सारंडा में आईईडी से फूलों धनवार की मौत, जंगलों में सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों का पुलिस पर कड़ा आक्रोश
लगातार विस्फोटों के बीच जिला पुलिस पर सवाल, सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त, निर्दोष ग्रामीण बन रहे निशाना

चाईबासा : सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट ने एक बार फिर जिला पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को कोलबोंगा गांव की 18 वर्षीय फूलों धनवार की मौत इस विस्फोट में हो गई जबकि सलामी कुंडलना (28) और बरसी धनवार (35) गंभीर रूप से घायल हैं। तीनों महिलाएं जंगल में सियाल पत्ता तोड़ने गई थीं यानी पूरी तरह असैन्य, सामान्य ग्रामीण गतिविधि लेकिन सुरक्षाबलों की निगरानी के दायरे में आने वाले इलाके में भी नक्सली विस्फोटक बिछाने में सफल रहे। विस्फोट की तीव्रता इतनी थी कि फूलों धनवार की मौके पर ही मौत हो गई। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। जराईकेला थाना पुलिस और सुरक्षा बल घटना स्थल पर पहुंचे पर ग्रामीणों का कहना है कि गश्ती और इलाके की सुरक्षा को लेकर जिला पुलिस की ओर से गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। ग्रामीणों ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि सारंडा जैसे संवेदनशील नक्सल क्षेत्र में आईईडी डिटेक्शन सिस्टम, नियमित कॉम्बिंग ऑपरेशन और सिविलियन मूवमेंट रूट्स की सुरक्षा पर पुलिस का ध्यान बेहद कमजोर है। पिछले महीनों में सारंडा में कई आईईडी विस्फोट हो चुके हैं लेकिन सुरक्षा मानकों व एसओपी को लागू करने में पुलिस की सुस्ती के कारण निर्दोष लोग बार-बार चपेट में आ रहे हैं। एसपी अमित रेणु ने बयान में सर्च ऑपरेशन की बात कही है लेकिन ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि केवल ऑपरेशन शुरू कर देना पर्याप्त नहीं, जंगल में सुरक्षा की सतत और प्रभावी व्यवस्था आवश्यक है। फूलों धनवार की मौत ने इलाके में भारी रोष पैदा कर दिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और पुलिस जिम्मेदारी तय करे, सुरक्षा बढ़ाए और नक्सल उन्मूलन अभियान को व्यवहारिक तरीके से तेज करे ताकि मासूम लोग दुबारा ऐसी घटनाओं का शिकार न हों।