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विकसित भारत @2047 सम्मेलन का योगदा सत्संग महाविद्यालय में सफल समापन

रिपोर्ट: VBN News Desk3 घंटे पहलेझारखण्ड

दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में अर्थव्यवस्था, तकनीक, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर हुई गहन चर्चा

विकसित भारत @2047 सम्मेलन का योगदा सत्संग महाविद्यालय में सफल समापन

रांची। योगदा सत्संग महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “विकसित भारत @ 2047 : शताब्दी वर्ष के लिए एक विकसित भारत की परिकल्पना” का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। 23-24 मई 2026 तक चले इस सम्मेलन का आयोजन झारखंड स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल एवं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार के प्रायोजन में किया गया। सम्मेलन के दूसरे दिन अनुसंधान, अकादमिक संवाद और भविष्य की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई।

पहले दिन आयोजित उद्घाटन सत्र और तकनीकी सत्रों की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए दूसरे दिन तकनीकी सत्र VI, VII एवं VIII का आयोजन हाइब्रिड और ऑफलाइन मोड में किया गया। इन सत्रों में देशभर से आए शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने अर्थव्यवस्था, व्यवसाय, स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

दोपहर दो बजे से समापन समारोह की शुरुआत हुई, जिसमें कई गणमान्य अतिथि शामिल हुए। महाविद्यालय के शासी निकाय के सचिव अश्वनी कुमार सक्सेना ने स्वागत भाषण में आयोजन की सफलता के लिए डॉ. रविंद्र कुमार, प्रो. सिमरन कौर और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। इसके बाद शासी निकाय के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) ज्ञान भूषण ने मुख्य अतिथि झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.के. सिंह तथा डॉ. पीयूष रंजन का स्वागत किया। वहीं सचिव अश्वनी कुमार सक्सेना ने डॉ. अमर कुमार चौधरी एवं डॉ. प्रिया चौरसिया को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

सम्मेलन की ‘रैपोर्टियर्स रिपोर्ट’ डॉ. मयूरी गौड़ ने प्रस्तुत की। इसके बाद मंचासीन अतिथियों ने अपने विचार साझा किए। मुख्य अतिथि एवं झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.के. सिंह ने कहा कि “विकसित भारत @2047 केवल सम्मेलन का विषय नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प है।” उन्होंने निर्यात को बढ़ाने और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में कार्य करने पर बल दिया।

झारखंड राय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीयूष रंजन ने कहा कि भारत पहले से ही विश्वगुरु रहा है। उन्होंने मुगलकाल से लेकर आजादी तक और आजादी के बाद आर्थिक विकास की यात्रा पर प्रकाश डाला। रांची विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर एवं पूर्व डीन डॉ. रंजना श्रीवास्तव ने विकसित भारत की दिशा में शिक्षा और आर्थिक नीति की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

रांची विश्वविद्यालय के वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं डीन डॉ. अमर कुमार चौधरी ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में तकनीक की भूमिका अहम है और युवाओं को इससे जुड़ना चाहिए। वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) की सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रिया चौरसिया ने भारत के विकास में युवा, महिलाएं, किसान और गरीबों को चार प्रमुख स्तंभ बताया।

शासी निकाय के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) ज्ञान भूषण (PVSM, UYSM, AVSM, VSM, ADC) ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि विकसित भारत का सपना सामूहिक प्रयासों से ही पूरा होगा। उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास” की भावना को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

समारोह के दौरान “सर्वश्रेष्ठ मौखिक शोध पत्र प्रस्तुति” पुरस्कार की घोषणा की गई, जिससे युवा शोधार्थियों में उत्साह का माहौल रहा। प्रतिभागियों ने सम्मेलन से प्राप्त अनुभव और अपने विचार भी साझा किए।

अंत में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए डॉ. रविंद्र कुमार ने आयोजन की सफलता के लिए महाविद्यालय के सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के सहयोग के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अभिषेक पांडेय ने किया। राष्ट्रगान के साथ सम्मेलन का विधिवत समापन हुआ तथा सभी प्रतिभागियों एवं शोधार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

यह दो दिवसीय सम्मेलन वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में अकादमिक जगत की सक्रिय भागीदारी और युवाओं की भूमिका सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

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