ताज़ा-ख़बर

16 साल से इकरारनामा का इंतजार, जवाब देने लगा बरवाडीह के दुकानदारों का धैर्य

रिपोर्ट: अकरम 7 घंटे पहलेझारखण्ड

दुकानें चालू, किराया तय नहीं, कानूनी अधिकार अधर में; स्ववित्तपोषित योजना पर उठे सवाल

16 साल से इकरारनामा का इंतजार, जवाब देने लगा बरवाडीह के दुकानदारों का धैर्य

बरवाडीह, लातेहार : बरवाडीह प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में वर्ष 2010 में स्ववित्तपोषित योजना के तहत निर्मित दुकानों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। 16 वर्ष बीत जाने के बावजूद यहां व्यवसाय कर रहे दुकानदारों को अब तक वैध इकरारनामा नहीं मिल पाया है। न तो दुकानों का विधिवत किराया निर्धारण हुआ और न ही व्यवसायियों को कोई कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराया गया। इस कारण दुकानदारों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। जानकारी के अनुसार तत्कालीन भूतपूर्व सांसद इंद्र सिंह नामधारी द्वारा वर्ष 2010 में इस योजना की आधारशिला रखी गई थी। योजना के तहत कुल 60 दुकानों और दो सीढ़ी प्लस कमरों का निर्माण कराया गया था। इनमें से 50 दुकानों का आवंटन विस्थापित दुकानदारों को किया गया जबकि 10 दुकानें एवं एक सीढ़ी प्लस कमरा अधूरा रह गया। योजना के अनुसार शेष दुकानों का आवंटन खुली डाक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना था तथा उससे प्राप्त राशि विस्थापितों के बीच वितरित की जानी थी। लेकिन वर्षों बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। दुकानदारों का कहना है कि वे लगातार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से इकरारनामा कराने तथा किराया निर्धारण की मांग करते आ रहे हैं लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। अब सवाल उठ रहा है कि जिस प्रक्रिया को वर्षों पहले पूरा हो जाना चाहिए था वह आखिर अब तक लंबित क्यों है। यदि कोई प्रशासनिक या तकनीकी बाधा है तो उसकी स्पष्ट जानकारी दुकानदारों को क्यों नहीं दी जा रही। व्यावसायिक संघ के अध्यक्ष दीपक राज ने कहा कि दुकानदार कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं बल्कि अपना वैधानिक अधिकार मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों से व्यवसायी असुरक्षा और अनिश्चितता के माहौल में दुकान चला रहे हैं। दुकानदार सिर्फ तीन सवालों का जवाब चाहते हैं कि इकरारनामा कब होगा, किराया कब तय होगा और उन्हें उनका कानूनी अधिकार कब मिलेगा। उन्होंने मांग की कि दुकानों का शीघ्र वैध इकरारनामा कराया जाए तथा प्रति दुकान किराया 3.50 रुपये अथवा अधिकतम 5 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से निर्धारित किया जाए। उनका कहना है कि स्पष्ट नियम और दस्तावेज मिलने से भविष्य में किसी प्रकार का विवाद नहीं होगा। नियमों के अनुसार सरकारी अथवा अर्धसरकारी परिसरों में निर्मित दुकानों के आवंटन, किराया निर्धारण एवं इकरारनामा की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जानी चाहिए। साथ ही संबंधित विभाग को आवंटित दुकानदारों को वैध दस्तावेज उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है ताकि व्यवसायियों को कानूनी सुरक्षा मिल सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस लंबे समय से लंबित मामले का जल्द समाधान निकालना चाहिए ताकि दुकानदारों को उनका अधिकार मिल सके।

इन्हें भी पढ़ें.