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फार्मेसी व्यवस्था पर बड़ा सवाल, सूचना के लिए बार-बार पत्राचार के बाद भी नहीं मिल रही जानकारी

रिपोर्ट: VBN News Desk2 घंटे पहलेझारखण्ड

झारखंड रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट एसोसिएशन की पहल रंग लाई, अपीलीय पदाधिकारी ने विभाग को दिए सख्त निर्देश

फार्मेसी व्यवस्था पर बड़ा सवाल, सूचना के लिए बार-बार पत्राचार के बाद भी नहीं मिल रही जानकारी

रांची/जमशेदपुर : झारखंड में ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित हो रही फार्मेसी व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। झारखंड रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट एसोसिएशन द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर लगातार पत्राचार के बावजूद विभाग की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मामला अब उच्च स्तर तक पहुंच गया है। एसोसिएशन के सचिव मानस मुखर्जी द्वारा स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग को लिखे गए पत्र में झारखंड डिप्लोमा फार्मेसी परीक्षा समिति से संबंधित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी। इसमें समिति के गठन, सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया, कार्यकाल, जवाबदेही, निरीक्षण व्यवस्था तथा नियमों के अनुपालन जैसे विषय शामिल थे। पत्र में स्पष्ट किया गया था कि यह जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई है लेकिन विभाग द्वारा समय पर जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद एसोसिएशन ने प्रथम अपील दायर की। अपील के बावजूद भी अपेक्षित सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रथम अपीलीय पदाधिकारी ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया कि संबंधित विभाग यथाशीघ्र मांगी गई सभी सूचनाएं उपलब्ध कराए। साथ ही यह भी कहा गया कि पूर्व में जारी पत्रों के बावजूद सूचना उपलब्ध नहीं कराना नियमों का उल्लंघन है और इसे गंभीरता से लिया जाएगा। एसोसिएशन ने अपने दूसरे पत्र में यह भी उल्लेख किया कि यदि सूचना उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की बाधा है तो उसका स्पष्ट कारण बताया जाए। साथ ही उन्होंने फार्मेसी एक्ट 1948 के तहत निर्धारित नियमों और पारदर्शिता के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की। इस पूरे प्रकरण ने राज्य में फार्मेसी व्यवस्था की निगरानी और संचालन को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के दवा दुकानों का संचालन न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि यह आम जनता के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा हो सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग अपीलीय पदाधिकारी के निर्देशों का कितनी तत्परता से पालन करता है और मांगी गई सूचनाएं कब तक उपलब्ध कराई जाती हैं। यदि समय पर पारदर्शी जवाब नहीं मिला तो यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है।

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