आदित्यपुर वार्ड 17 में लोकतांत्रिक मर्यादा पर सवाल, मतदान केंद्र में समर्थकों संग घुसे बॉबी सिंह, पत्रकार से कथित दुर्व्यवहार
70-80 समर्थकों के साथ बूथ पर हंगामा, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम व आचार संहिता उल्लंघन की आशंका

आदित्यपुर : नगर निगम के वार्ड 17 स्थित सेंट्रल पब्लिक स्कूल मतदान केंद्र पर चुनाव के दिन उस समय गंभीर विवाद खड़ा हो गया जब प्रत्याशी अमित सिंह उर्फ बॉबी सिंह पर मतदान केंद्र के भीतर समर्थकों के साथ प्रवेश कर हंगामा करने और एक स्थानीय पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार करने के आरोप लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रशासनिक गड़बड़ी को उजागर कर रहे पत्रकार को एक विशेष प्रत्याशी का समर्थक बताकर सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया। आरोप है कि बॉबी सिंह 70-80 समर्थकों के साथ मतदान केंद्र परिसर में पहुंचे जहां निषेधाज्ञा लागू थी। समर्थकों द्वारा अमर्यादित भाषा के प्रयोग की भी शिकायत सामने आई है। स्थिति बिगड़ते देख मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर सभी को बूथ परिसर से बाहर निकाला। निरीक्षण पर पहुंचे निर्वाची पदाधिकारी सह अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव कुमार ने समर्थकों को कड़ी चेतावनी देते हुए निषेधाज्ञा क्षेत्र से बाहर जाने का निर्देश दिया और शांति बनाए रखने को कहा।

अंदरूनी गड़बड़ी से शुरू हुआ विवाद
सूत्रों के अनुसार वार्ड 17 के लिए सेंट्रल पब्लिक स्कूल परिसर में पांच बूथ बनाए गए थे। बूथ संख्या 124 पर बीएलओ के रूप में सत्यम भारद्वाज की नियुक्ति थी। मतदाताओं की शिकायत थी कि पर्ची और उपलब्ध मतदाता सूची में मेल नहीं हो रहा था जिससे कई मतदाताओं को लौटना पड़ा। शिकायत सामने आने पर उपायुक्त के निर्देश पर संबंधित बीएलओ को हटाया गया। आरोप है कि हटाए जाने के बाद वे मतदाता सूची अपने साथ ले गए जिससे लगभग डेढ़ घंटे तक मतदान प्रक्रिया प्रभावित रही। बाद में वैकल्पिक व्यवस्था कर मतदान दोबारा शुरू कराया गया। इसी बीच यह प्रचारित किया गया कि पत्रकार किसी प्रत्याशी विशेष के पक्ष में मतदाताओं को प्रभावित कर रहा है। इसी आधार पर कथित रूप से बॉबी सिंह समर्थकों के साथ बूथ में पहुंचे और हंगामा हुआ।

कौन-कौन से नियम लागू हो सकते हैं?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार मतदान केंद्र के 100 मीटर दायरे में भीड़ इकट्ठा करना या अनधिकृत प्रवेश करना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 130 के अंतर्गत दंडनीय है। यदि मतदाताओं को प्रभावित करने या भयभीत करने का प्रयास सिद्ध होता है तो भारतीय दंड संहिता की धारा 171C (अनुचित प्रभाव) लागू हो सकती है। इसके अतिरिक्त यदि किसी लोकसेवक के कार्य में बाधा पहुंचाई गई हो तो धारा 186 (लोक सेवक के कार्य में बाधा) भी लागू हो सकती है। आदर्श आचार संहिता के तहत मतदान केंद्र पर प्रचार, नारेबाजी या भीड़ जुटाना स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित है।

प्रेस की स्वतंत्रता पर भी प्रश्न
पत्रकार पक्ष का कहना है कि उन्होंने संभावित गड़बड़ी उजागर कर अपना दायित्व निभाया। यदि कोई प्रमाणित कर दे कि उन्होंने मतदान प्रभावित करने की कोशिश की तो वे कार्रवाई को तैयार हैं। लेकिन सवाल यह है कि किसी प्रत्याशी या समर्थक को मतदान केंद्र के भीतर जाकर पत्रकार से उलझने या भीड़ के साथ दबाव बनाने का अधिकार किसने दिया? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता भी निहित है। चुनाव के दौरान मीडिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष भूमिका लोकतंत्र का अहम स्तंभ मानी जाती है।

प्रशासन की निगरानी जारी
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जा रही है। यदि जांच में नियम उल्लंघन प्रमाणित होता है तो संबंधित धाराओं के तहत विधिसम्मत कार्रवाई संभव है। फिलहाल मतदान प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी है लेकिन वार्ड 17 की यह घटना चुनावी पारदर्शिता और आचार संहिता के पालन पर गंभीर बहस को जन्म दे चुकी है। आदित्यपुर की यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि लोकतंत्र में चुनाव केवल मतदान का आयोजन नहीं बल्कि नियमों, मर्यादाओं और संस्थाओं के सम्मान का भी नाम है।