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खेतों में डिजिटल क्रांति की दस्तक, अब बेटियाँ बनेंगी कृषि की नई टेक्नोलॉजी लीडर

रिपोर्ट: VBN News Desk6 दिन पहलेआर्टिकल

मोबाइल, ड्रोन और एआई से बदलेगी खेती की तस्वीर, ग्रामीण भारत में महिलाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार

खेतों में डिजिटल क्रांति की दस्तक, अब बेटियाँ बनेंगी कृषि की नई टेक्नोलॉजी लीडर

रिपोर्ट : सौरभ कुमार, जादूगोड़ा

भारत की पहचान सदियों से एक कृषि प्रधान देश के रूप में रही है। यहां की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सामाजिक जीवन का बड़ा हिस्सा खेती से जुड़ा रहा है। लंबे समय तक खेती का अर्थ था खेतों में कठिन परिश्रम, मौसम पर निर्भरता और पारंपरिक अनुभवों के आधार पर निर्णय लेना। लेकिन 21वीं सदी के तीसरे दशक में कृषि क्षेत्र एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब खेती केवल हल, बैल और खेतों तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि यह मोबाइल, इंटरनेट, ड्रोन, सेंसर, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ती जा रही है। इस बदलती तस्वीर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में महिलाओं, विशेषकर कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने वाली छात्राओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। वे केवल खेतों में काम करने वाली सहयोगी नहीं रहेंगी बल्कि डिजिटल तकनीक की मदद से किसानों का मार्गदर्शन करने वाली डिजिटल कृषि वैज्ञानिक बन सकती हैं।

कृषि शिक्षा प्राप्त बेटियों के सामने चुनौती

देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से हर वर्ष हजारों छात्राएं कृषि विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री लेकर निकलती हैं। ये छात्राएं फसल विज्ञान, मृदा प्रबंधन, जैविक खेती, सिंचाई तकनीक, पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि अभियांत्रिकी, कृषि अर्थशास्त्र और प्रिसिजन फार्मिंग जैसे आधुनिक विषयों का अध्ययन करती हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कृषि स्नातक युवतियों को उनकी योग्यता के अनुरूप अवसर नहीं मिल पाते। ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित रोजगार, दूरदराज के इलाकों में पोस्टिंग, सुरक्षा संबंधी चिंताएं और कृषि क्षेत्र की पारंपरिक कार्यशैली उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। यही कारण है कि कई प्रतिभाशाली छात्राएं कृषि क्षेत्र में अपना करियर बनाने के बजाय दूसरे क्षेत्रों की ओर रुख कर लेती हैं। लेकिन अब तकनीक इस स्थिति को बदलने की क्षमता रखती है।

खेती में एआई और डिजिटल तकनीक का बढ़ता दखल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकों ने कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। कल्पना कीजिए कि एक किसान अपने खेत की फसल की तस्वीर मोबाइल फोन से खींचकर किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भेजता है। कुछ ही मिनटों में सिस्टम यह विश्लेषण कर बता देता है कि फसल में कौन-सी बीमारी है, मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है, कितनी सिंचाई की आवश्यकता है और आने वाले दिनों में मौसम का क्या प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि मशीनें केवल प्रारंभिक विश्लेषण प्रदान करती हैं। अंतिम और व्यावहारिक सलाह के लिए कृषि विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। यही वह क्षेत्र है जहां कृषि शिक्षा प्राप्त युवतियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

मानव और तकनीक का समन्वय

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की कृषि केवल मशीनों पर आधारित नहीं होगी। वास्तविक सफलता मानव बुद्धिमत्ता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संयोजन में छिपी है। इसे ह्यूमन-असिस्टेड अडैप्टिव इंटेलिजेंस कहा जा सकता है जहां एआई डेटा का विश्लेषण करता है और प्रशिक्षित कृषि विशेषज्ञ उस जानकारी को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किसानों तक पहुंचाते हैं। उदाहरण के लिए एआई यह बता सकता है कि फसल में रोग का खतरा है लेकिन स्थानीय जलवायु, मिट्टी की प्रकृति और किसान की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए समाधान सुझाने का कार्य कृषि विशेषज्ञ करेंगे।

डिजिटल कृषि में महिलाओं के लिए नए अवसर

डिजिटल कृषि के विस्तार के साथ अनेक नए रोजगार भी पैदा होंगे। इनमें महिलाओं की भागीदारी स्वाभाविक रूप से बढ़ सकती है क्योंकि इन कार्यों को दूरस्थ स्थानों से भी संचालित किया जा सकता है। भविष्य में रिमोट क्रॉप इंटेलिजेंस एनालिस्ट, डिजिटल सिंचाई सलाहकार, एआई-सहायता प्राप्त कीट निगरानी विशेषज्ञ, क्लाइमेट रिस्क मॉनिटरिंग एसोसिएट, एग्री-टेक सपोर्ट एग्जीक्यूटिव, डिजिटल फार्म मैनेजर, डेटा आधारित कृषि सलाहकार तथा एक्वाकल्चर इंटेलिजेंस ऑपरेटर सहित नई भूमिकाएं सामान्य हो सकती हैं। इन पदों पर कार्य करने के लिए हर समय खेत में उपस्थित रहना आवश्यक नहीं होगा। विशेषज्ञ अपने घर, कृषि सहायता केंद्र, विश्वविद्यालय, स्टार्टअप हब या डिजिटल कमांड सेंटर से भी किसानों की मदद कर सकेंगे।

किसानों को क्या मिलेगा लाभ?

डिजिटल कृषि का सबसे बड़ा लाभ किसानों को होगा। आज भी कई किसान फसल रोग, मौसम की अनिश्चितता और बाजार संबंधी जानकारी के अभाव में नुकसान उठाते हैं। नई तकनीक के माध्यम से फसल रोगों की प्रारंभिक पहचान संभव होगी, उर्वरकों और कीटनाशकों का संतुलित उपयोग होगा, पानी की बचत होगी, उत्पादन लागत कम होगी, पैदावार में वृद्धि होगी, मौसम आधारित जोखिमों को कम किया जा सकेगा तथा कृषि निर्णय अधिक वैज्ञानिक होंगे। इसके परिणामस्वरूप किसानों की आय बढ़ने की संभावना भी मजबूत होगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार

डिजिटल कृषि केवल खेती की तकनीक नहीं है बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनर्गठन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। जब गांवों में डिजिटल कृषि सेवाओं की मांग बढ़ेगी, तब वहां स्थानीय स्तर पर तकनीकी सहायता केंद्र, डेटा प्रोसेसिंग यूनिट, कृषि परामर्श केंद्र और डिजिटल सेवा हब विकसित होंगे। इससे ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। विशेष रूप से कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने वाली छात्राओं को अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक और सुरक्षित रोजगार मिल सकता है। इससे महिला सशक्तिकरण को भी नई दिशा मिलेगी।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

भारत विश्व के सबसे बड़े कृषि देशों में से एक है। साथ ही यहां कृषि शिक्षा प्राप्त युवाओं की भी बड़ी संख्या उपलब्ध है। यदि इन दोनों संसाधनों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा जाए तो कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में वही देश कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे जो तकनीक, वैज्ञानिक ज्ञान और स्थानीय अनुभव को एक साथ जोड़ पाएंगे। भारत के पास यह अवसर मौजूद है। इसके लिए सरकार, कृषि विश्वविद्यालयों, निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को मिलकर ऐसे प्लेटफॉर्म विकसित करने होंगे जहां किसान और कृषि विशेषज्ञ डिजिटल माध्यम से सीधे जुड़ सकें।

नई कहानी लिखने को तैयार है भारतीय कृषि

भारत को केवल खेती में अधिक श्रमिकों की आवश्यकता नहीं है बल्कि ऐसी स्मार्ट, सुरक्षित और तकनीक-संचालित कृषि व्यवस्था की जरूरत है जिसमें ज्ञान और तकनीक का सर्वोत्तम उपयोग हो। संभव है कि आने वाले वर्षों में किसी गांव के किसान की फसल की निगरानी सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठी एक कृषि विशेषज्ञ कर रही हो। वह विशेषज्ञ कोई युवा कृषि वैज्ञानिक हो सकती है और वह एक बेटी भी हो सकती है जिसने कृषि विज्ञान में शिक्षा प्राप्त की हो। यदि यह सपना साकार होता है तो यह केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं होगी बल्कि भारतीय कृषि, ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के इतिहास में एक नई क्रांति का अध्याय होगा। डिजिटल कृषि के इस नए दौर में बेटियां केवल सहभागी नहीं बल्कि परिवर्तन की अगुआ बनकर उभर सकती हैं।

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