रांची के बोड़ेया गांव में ग्राम सभा का फैसला, ईसाई धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर लगाई रोक
चंगाई प्रार्थना सभाओं पर भी प्रतिबंध का निर्णय, बोड़ेया चौक पर सूचना बोर्ड लगाकर दी जानकारी

रांची : झारखंड के आदिवासी बहुल गांवों में धार्मिक प्रचार और मतांतरण से जुड़ी गतिविधियों को लेकर ग्राम सभा के स्तर पर निर्णय लिए जाने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में रांची जिले के बोड़ेया गांव की ग्राम सभा ने ईसाई धर्म प्रचारकों, पादरियों और पास्टरों के गांव में प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। ग्राम सभा के फैसले की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए बोड़ेया चौक पर सूचना बोर्ड भी लगाया गया है। ग्राम प्रधान अनिल उरांव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने धार्मिक प्रचार और मतांतरण से जुड़ी गतिविधियों पर चर्चा की। बैठक में बीमारी ठीक करने के नाम पर आयोजित की जाने वाली चंगाई प्रार्थना सभाओं और प्रार्थना महोत्सव जैसे कार्यक्रमों पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया गया।
सर्वसम्मति से निर्णय लेने का दावा
गांव की मुखिया सोमा उरांव के अनुसार बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि गांव में धर्म प्रचार से जुड़ी गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से पादरियों, पास्टरों और अन्य ईसाई धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया है। इसके बाद बोड़ेया चौक पर बोर्ड लगाकर ग्राम सभा के निर्णय को सार्वजनिक किया गया।
इटकी के गांव में भी लिया गया था ऐसा फैसला
उल्लेखनीय है कि इसी महीने रांची जिले के इटकी प्रखंड के हरमू सालोटोली गांव में भी ग्राम सभा ने पादरियों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया था। वहां भी ग्रामीणों ने इस संबंध में बोर्ड लगाया था। बोड़ेया में लिए गए फैसले के बाद आदिवासी क्षेत्रों में धार्मिक प्रचार, मतांतरण और ग्राम सभा के अधिकारों को लेकर बहस फिर तेज होने की संभावना है।
कानूनी वैधता पर स्थिति स्पष्ट नहीं
ग्राम सभा के निर्णय की कानूनी वैधता और इसे लागू करने की सीमा पर जिला प्रशासन का रुख उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और ग्राम सभा के अधिकारों के संदर्भ में इस फैसले की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। बैठक में जिला परिषद सदस्य किरण देवी, वार्ड सदस्य कैलाश मंडा और जनजाति सुरक्षा मंच के प्रदेश सदस्य सनी उरांव सहित झरी उरांव, राजन उरांव, अरविंद साहू, फूलचंद तिर्की, आदित्य महतो, संतु कुमार महतो, प्रदीप टोप्पो, परना उरांव, बालेश्वर पाहन, प्रदीप पाहन, मालती देवी, सुनीता देवी, बासो देवी, बीरन देवी, प्रोफेसर गंवा तिग्गा, राजू उरांव और रामधन उरांव समेत कई ग्रामीण उपस्थित थे।