न्याय की पहली चौखट पर ही परेशानी! आवेदन की पावती के लिए भी करनी पड़ती है मिन्नतें, झारखंड पुलिस की जवाबदेही पर सवाल
थानों में शिकायत की रिसीविंग देने में आनाकानी पर सवाल, लोहरदगा सदर थाना में महिला से कथित दुर्व्यवहार का आरोप

लोहरदगा : आम नागरिकों को न्याय दिलाने की पहली कड़ी माने जाने वाले थानों में यदि शिकायत का आवेदन जमा करने और उसकी प्राप्ति रसीद लेने के लिए भी लोगों को मिन्नतें करनी पड़ें तो पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोहरदगा सदर थाना में सामने आए एक मामले ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। बेटी के घर से बिना बताए चले जाने की शिकायत लेकर पहुंची महिला ने पुलिसकर्मियों पर आवेदन लेने में आनाकानी करने और प्राप्ति रसीद मांगने पर गाली-गलौज तथा अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है। पीड़ित महिला के अनुसार वह 28 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब एक बजे अपने पति के साथ लोहरदगा सदर थाना पहुंची थी। दंपती अपनी बेटी के घर से बिना बताए चले जाने के मामले में शिकायत दर्ज कराना चाहता था। आरोप है कि शुरुआत में उनका आवेदन नहीं लिया गया। काफी मिन्नत-विनती के बाद आवेदन स्वीकार किया गया। इसके बाद जब दंपती ने आवेदन की प्राप्ति रसीद मांगी, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और गाली-गलौज की। पीड़ित परिवार ने अपनी आपबीती वहां मौजूद जय श्री राम समिति, लोहरदगा के सदस्यों को भी बताई।
रिसीविंग नहीं मिलने की शिकायत कितनी गंभीर?
यह मामला केवल एक परिवार की परेशानी तक सीमित नहीं है। झारखंड के विभिन्न थानों में आवेदन की प्राप्ति रसीद नहीं मिलने की शिकायतें सामने आने पर यह सवाल उठता है कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होगी। लिखित शिकायत की पावती शिकायतकर्ता के पास आवेदन जमा करने का प्रमाण होती है। इसके अभाव में आगे की कार्रवाई के बारे में जानकारी लेना भी मुश्किल हो सकता है। घटना के समय थाना परिसर में मौजूद कुछ मीडियाकर्मियों ने भी समस्या को लेकर थाना प्रभारी से मिलने और आवेदन देने की कोशिश की। आरोप है कि थाना प्रभारी ने बातचीत करने से इनकार करते हुए आवेदन देकर चले जाने को कहा। हालांकि इस पूरे मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष और पुलिस का आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है।
पुलिस प्रशासन से जांच की अपेक्षा
झारखंड पुलिस के नागरिक चार्टर में स्पष्ट उल्लेख है कि लिखित शिकायत मिलने पर संबंधित थाना प्रभारी को उसकी प्राप्ति की पावती देनी चाहिए। ऐसे में सवाल है कि लोहरदगा सदर थाना में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कौन करेगा? क्या जिला पुलिस प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर शिकायतकर्ता और संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष सुनेगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब और आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।