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गुमला में गैस के लिए हाहाकार: विधायक भूषण तिर्की का अल्टीमेटम

रिपोर्ट: शनिरंजन 3 घंटे पहलेझारखण्ड

जनता की परेशानी बर्दाश्त नहीं, बंद करें कालाबाजारी का खेल

गुमला में गैस के लिए हाहाकार: विधायक भूषण तिर्की का अल्टीमेटम

गुमला/चैनपुर: गुमला जिले में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। गुमला जिला मुख्यालय सहित रायडीह, चैनपुर, जारी और डूंमरी में स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। इस गंभीर संकट पर गुमला विधायक भूषण तिर्की ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए गैस एजेंसियों और प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है। विधायक ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उपभोक्ताओं को उनके हक का सिलेंडर उनके घर तक मिलना चाहिए न कि उन्हें दिन-भर लाइनों में खटना पड़े।

विधायक भूषण तिर्की ने जिले की स्थिति पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक अदद गैस सिलेंडर पाने के लिए गरीब जनता को अपना पूरा दिन और दिहाड़ी छोड़कर गैस एजेंसी के बाहर खड़ा रहना पड़ रहा है। उन्होंने कहा की होम डिलीवरी सर्विस पूरी तरह ठप हो चुकी है जो सीधा-सीधा उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन है। ग्रामीण क्षेत्रों से लोग किराया खर्च कर शहर आ रहे हैं और फिर भी खाली हाथ लौट रहे हैं यह व्यवस्था की नाकामी है। विधायक ने गैस वितरण प्रणाली में व्याप्त तकनीकी खामियों पर भी सवाल उठाए।

वर्तमान में लागू ओटीपी व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिए जी का जंजाल बन गई है। सिस्टम की लापरवाही के कारण कई बार ओटीपी नहीं आता जिससे घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी ग्राहक को बैरंग लौटना पड़ता है। विधायक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि गैस वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। एजेंसियां तत्काल होम डिलीवरी सेवा बहाल करें। तकनीकी बाधाओं के नाम पर उपभोक्ताओं को परेशान करना बंद हो। जिले में गैस की किल्लत के बीच पनप रहे कालाबाजारी के खेल पर भूषण तिर्की ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व इस संकट का फायदा उठाकर ऊंचे दामों पर गैस बेच रहे हैं। विधायक ने स्पष्ट किया की कालाबाजारी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ऐसे तत्वों और मिलीभगत करने वाली एजेंसियों पर कड़ी लगाम लगाए।

अगर जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी तो आंदोलन तय है। रसोई गैस की किल्लत के कारण चैनपुर अनुमंडल समेत पूरे जिले का हाल बेहाल है। डूंमरी और जारी जैसे सुदूर इलाकों से आने वाले ग्रामीणों का कहना है कि 20 से 25 दिनों तक की वेटिंग दी जा रही है। ऐसे में घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। मजबूरन लोग फिर से लकड़ी के चूल्हे की ओर लौट रहे हैं जिससे उज्ज्वला योजना' के उद्देश्यों पर भी सवालिया निशान लग रहा है। रसोई गैस उपलब्ध नहीं होने के कारण जंगलों की कटाई भी बढ़ रही है।

जिन जंगलों की कटाई लड़की चूल्हा जलाने के लिए थम सी गई रही थी अब ग्रामीण जंगलों की ओर आश्रित होकर लकड़ी काटने का काम शुरू कर रहे हैं। विधायक भूषण तिर्की ने यह भी कहा है कि यह संकट केवल आपूर्ति की कमी नहीं, बल्कि कुप्रबंधन और एजेंसियों की मनमानी का नतीजा है। उनका कहना है कि जब तक घर-घर सिलेंडर पहुंचाने की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होती तब तक प्रशासन को राहत शिविरों की तर्ज पर वितरण की निगरानी करनी चाहिए।

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