भू-माफियाओं ने आदिवासियों के जमीन और घरों को करा लिया अपने नाम, स्कूल को भी नहीं छोड़ा
घर खाली करने की धमकी दे रहे हैं भू-माफिया, एकजुट हुए आदिवासी समाज
3.60 एकड़ भूमि को कराया गया है फर्जी बंदोबस्त, डीसी ने दिया जांच का आदेश
पलामू के पांकी के होटाई पंचायत के केरकी महुगांई का मामला, आंदोलन की चेतावनी

फोटो कैप्शन : सदर एसडीओ कार्यालय के समक्ष गुहार लगाने पंहुचे ग्रामीण
मेदिनीनगर : झारखंड में आदिवासियों की जमीन पर भू-माफियाओं का कब्ज़ा लगातार गहराता जा रहा है। ताज़ा मामला पलामू जिले के पांकी प्रखंड के होटाई पंचायत के केरकी महुगांई गांव का है, जहां आदिवासी (उरांव) परिवारों की पुश्तैनी जमीन तक को भू - माफियाओं ने कागज़ों पर हड़प लिया। आदिवासियों का आरोप है कि भू-माफियाओं ने पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से झूठे कागज़ात बनवाकर उनके घर और स्कूल तक का बंदोबस्त अपने नाम करवा लिया है। जबकि जमीन पर आज भी आदिवासियों का वास्तविक कब्ज़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सुनियोजित साज़िश है, ताकि आदिवासियों को उनके पैतृक घर से बेघर कर दिया जाए। जबरन बेदखल की कोशिश के खिलाफ पूरे गांव के आदिवासी लोग एकजुट हो गए हैं। उनका कहना है कि हम लोग अपनी जमीन किसी भी कीमत पर लूटने नहीं देंगे। यह हमारी पहचान और अस्तित्व से जुड़ा सवाल है। गांव के मिथलेश उरांव, नारेंद उरांव, विकेश्वर उरांव, रामकिशुन उरांव समेत दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि 1990 में सरकार द्वारा गांव के आदिवासी परिवारों को खाता 30 प्लॉट 18, 18/1,18/2, 1/ए, 6/ए अन्य में कुल 25 एकड़ भूमि का विधिवत तरीके से बंदोबस्त किया गया था। उक्त भूमि पर आज भी आदिवासी परिवारों का कब्जा है। कई पीढ़ियों से खेती किसानी करते आ रहे हैं। उक्त जमीन पर आदिवासी परिवारों का घर मकान बना हुआ है। गांव के ही पच्चु मोची, लच्छू मोची, टुपु मोची, नन्हू मोची, चरण मोची और स्वर्गीय बिंदेश्वर मोची (सभी के पिता रामपति मोची) अवैध तरीके से 1992 ईस्वी में 3.60 एकड़ बंदोबस्त कर लिया। कर्मचारी और अधिकारियों की मिलीभगत से पैसे के बल पर रसीद भी कटवा लिया। एक ही जमीन को दो-दो बार बंदोबस्त होना कई सवालों को खड़ा करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब 1990 में आदिवासियों के नाम पर भूमि बंदोबस्त हो गया, तो दोबारा 1992 में वही भूमि को फिर से बंदोबस्त कैसे किया गया? भू- माफियाओं ने कई आदिवासी परिवार का घर मकान को भी अपने नाम करा लिया है। स्कूल जमीन को भी भू - माफियाओं ने नहीं छोड़ा। शुक्रवार को गांव के दर्जनों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग पलामू उपायुक्त, पलामू एसपी, सदर एसडीओ से मुलाकात कर लिखित शिकायत किया। ग्रामीणों ने बताया कि भू - माफियाओं ने पहले गलत तरीके से उनके जमीन को बंदोबस्त कराया, अब उन्हें घर खाली करने की धमकी दिया जा रहा है। 28 अगस्त 2025 को गांव के ही भू - माफिया के सुरेंद्र मोची, लाल बहादुर मोची (पिता टुपू मोची), राजदेव मोची, सतन मोची (पिता पच्चू मोची), मधु मोची (पिता चरण मोची), पिंटू मोची (पिता विनोद मोची), विपिन मोची (पिता सतन मोची) व अन्य अज्ञात लोगों के द्वारा आदिवासी मोहल्ले में जाकर गाली गलौज, घर खाली करने की धमकी, महिलाओं के साथ मारपीट, छेड़खानी और इज्जत लूटने का प्रयास किया गया। आरोप है कि घटना के बाबत पांकी थाना को लिखित सूचना दी गई
। ग्रामीणों ने डीसी, एसपी और एसडीओ से पूरे मामले की जांच कर दोषी लोगों पर कार्रवाई करने और न्याय दिलाने की गुहार लगाया है। वहीं ग्रामीणों के शिकायत को गंभीरता पूर्वक सुनने के बाद पलामू उपायुक्त ने कार्रवाई का भरोसा दिया है। ग्रामीण ने बताया कि झारखंड सरकार जहां एक ओर खुद को आदिवासी हितैषी बताती है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी मुख्यमंत्री की मौजूदगी में भी भू - माफियाओं का हौसला इतना बुलंद होना बड़ा सवाल खड़ा करता है। अगर इसी तरह आदिवासियों की जमीन पर कब्ज़ा होता रहा, तो झारखंड की अस्मिता और संविधान की पांचवी अनुसूची की रक्षा कैसे होगी? ग्रामीणों ने सरकार से मांग किया है कि तुरंत इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी भू-माफियाओं तथा उनके मददगार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
मामले की कराई जाएगी जांच : डीसी
पलामू उपायुक्त समीरा एस ने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आदिवासियों की जमीन को फिर से बंदोबस्त कैसे किया गया, इसकी जांच कराया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच करने का आदेश दिया गया है।