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पुत्र की चाह में इकलौती बेटी की हत्या करने वाले पिता को उम्रकैद

रिपोर्ट: Roshan Sahdeo1 दिन पहलेझारखण्ड

अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपी की पत्नी, चिकित्सक, अनुसंधान पदाधिकारी (आईओ) समेत कुल 11 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।

पुत्र की चाह में इकलौती बेटी की हत्या करने वाले पिता को उम्रकैद

लोहरदगा। पुत्र प्राप्ति की लालसा में अपनी इकलौती नाबालिग पुत्री की निर्मम हत्या करने वाले पिता को जिला एवं सत्र न्यायालय ने सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजकमल मिश्रा की अदालत ने पेशरार थाना क्षेत्र के सुमन नगेसिया को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद तथा 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

लोक अभियोजक भरत राम ने बताया कि मामला 11 नवंबर 2020 का है। सुमन नगेसिया को दांपत्य जीवन में एक पुत्री की प्राप्ति हुई थी, लेकिन उसे पुत्र पाने की तीव्र इच्छा थी। इसी दौरान उसकी बातचीत ओझा डेमच नगेसिया से हुई। अभियोजन के अनुसार, ओझा ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्री की बलि देने की बात कही थी, जिसे आरोपी ने गंभीरता से ले लिया।

घटना के दिन आरोपी की पत्नी फूलमनिया नगेसिया घर से बाहर काम पर गई हुई थी। घर में अकेले खेल रही अपनी मासूम पुत्री पर सुमन नगेसिया ने टांगी से हमला कर उसकी नृशंस हत्या कर दी। घटना को गांव के मूक-बधिर सुधीर नगेसिया ने देख लिया और ग्रामीणों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया। घटना के बाद फूलमनिया नगेसिया ने पेशरार थाना में कांड संख्या 14/2020 दर्ज कराते हुए अपने पति को नामजद अभियुक्त बनाया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया तथा हत्या में प्रयुक्त खून से सनी टांगी बरामद की थी।

इस मामले की सुनवाई सेशन ट्रायल संख्या 48/2021 के तहत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपी की पत्नी, चिकित्सक, अनुसंधान पदाधिकारी (आईओ) समेत कुल 11 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। सभी साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी के विरुद्ध हत्या सहित अन्य आरोपों को सिद्ध पाया। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने सुमन नगेसिया को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय के इस फैसले को जिले में अंधविश्वास के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।

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