सरहुल पर ‘परब भागीदारी’ पहल, बाघ देवता की स्थापना के साथ वन संरक्षण का संकल्प
मांदर-नगाड़ों की गूंज के बीच जागरूकता का संदेश - जंगल बचेगा तभी संस्कृति सुरक्षित रहेगी

बरवाडीह, लातेहार : पलामू टाइगर रिजर्व (नॉर्थ) के छिपादोहर पश्चिमी वन क्षेत्र अंतर्गत लात गांव में सरहुल महापर्व के अवसर पर परब भागीदारी कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक आस्था के साथ-साथ वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने किया जबकि पश्चिमी वन क्षेत्र पदाधिकारी अजय कुमार टोप्पो एवं उनकी टीम ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरहुल के पारंपरिक माहौल में मांदर की थाप, नगाड़ों की गूंज और आदिवासी लोकनृत्य ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बाघ देवता की स्थापना रही जिसे जंगल और वन्यजीव संरक्षण के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस दौरान ग्रामीणों को जंगलों के महत्व, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए जागरूक किया गया। बरवाडीह प्रखंड के लात पंचायत स्थित लात बंगला में भी सरहुल पर्व धूमधाम से मनाया गया जहां 13 गांवों की नृत्य मंडलियों ने पारंपरिक वेशभूषा में शानदार प्रस्तुति दी। कलाकारों की प्रस्तुति ने स्थानीय संस्कृति की समृद्ध झलक पेश की और उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समापन अवसर पर सभी नृत्य मंडलियों को मांदर और नगाड़ा भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वनकर्मी, जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण शामिल हुए। स्थानीय कलाकारों ने अधिकारियों का पारंपरिक रीति-रिवाज से स्वागत किया और मांदर की थाप पर अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी झूमते नजर आए। इस पहल के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जंगल बचेगा तभी हमारा संस्कृति और जीवन सुरक्षित रहेगा।