औद्योगिक विकास के साथ हरित क्रांति की ओर बढ़ता सरायकेला-खरसावां, व्यावसायिक खेती बनेगी आय का नया आधार
उपायुक्त नीतीश कुमार की सोच : खेती को उद्योग से जोड़ेंगे, उत्पादन से बाजार तक मजबूत चेन बनाकर बढ़ेगी किसानों की आय

सरायकेला-खरसावां : जिले में तेज़ी से हो रहे औद्योगिक विकास के बीच अब कृषि क्षेत्र में भी एक नई हरित क्रांति की नींव रखी जा रही है। जिला प्रशासन पारंपरिक खेती की सीमाओं को पार करते हुए व्यावसायिक फसलों को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। इस पहल के पीछे उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह की स्पष्ट सोच है कि अगर खेती को उद्योग से जोड़ा जाए तो किसानों की आय कई गुना बढ़ सकती है। प्रशासन द्वारा तैयार किए गए विस्तृत प्लान के तहत जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में टमाटर, मिर्च, चिरौंजी और हल्दी जैसी फसलों की संभावनाओं को चिन्हित किया गया है। इचागढ़ और गम्हरिया क्षेत्र में टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट को लेकर हुए एमओयू इस दिशा में एक सफल मॉडल बन चुका है। अब इसी तर्ज पर अन्य फसलों के लिए भी छोटे-छोटे प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है ताकि किसानों को स्थानीय स्तर पर ही अपनी उपज का मूल्य संवर्धन मिल सके। इस पूरी योजना की खास बात यह है कि इसमें केवल उत्पादन पर ही नहीं बल्कि फार्म टू मार्केट यानी खेत से बाजार तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए महिला स्वयं सहायता समूहों, जेएसएलपी की महिलाओं, लैंप्स समितियों और राज्य सरकार के फेडरेशन सिडकोफेड को एक प्लेटफॉर्म पर लाया गया है। इन सभी संस्थाओं के समन्वय से खेती, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग को एकीकृत करने का प्रयास किया जा रहा है। उपायुक्त नीतीश कुमार की सोच स्पष्ट है कि जब तक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलेगा तब तक कृषि में स्थायी सुधार संभव नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन बैकवर्ड लिंकेज पर विशेष जोर दे रहा है। स्थानीय प्रोसेसिंग यूनिट्स और बड़े थोक खरीदारों के साथ सीधा संपर्क स्थापित किया जा रहा है ताकि किसानों को बिचौलियों पर निर्भर न रहना पड़े और उनकी आय में सीधा लाभ पहुंचे। हल्दी उत्पादन के क्षेत्र में भी जिले में व्यापक संभावनाएं हैं लेकिन पिछले दो वर्षों में इसमें गिरावट देखी गई थी। अब प्रशासन ने इसे फिर से बढ़ाने की दिशा में विशेष पहल शुरू की है। इसके तहत हल्दी की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही अन्य राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर किसानों की उपज की सीधी खरीद की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं। इससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा कोकून (रेशम) उत्पादन को भी बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित हो सकें। प्रशासन का मानना है कि कृषि और उद्योग के इस समन्वित मॉडल से न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। जिला प्रशासन द्वारा तैयार की गई यह योजना अब अंतिम चरण में है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 5 से 6 महीनों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगेंगे। इससे जिले में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। कुल मिलाकर सरायकेला-खरसावां अब केवल औद्योगिक पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि हरित क्रांति के नए मॉडल के रूप में उभरने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जहां उद्योग और खेती एक-दूसरे के पूरक बनकर विकास की नई कहानी लिखेंगे।