आजादी के दशकों बाद भी विकास की राह देख रहे सकला सिमड़ी टोला और दलदली
3–4 किमी बदहाल सड़क बनी अभिशाप, बारिश में कट जाता है संपर्क; ग्रामीण बोले– चुनाव में वादे, बाद में कोई नहीं सुनता आजादी के कई दशक बीत जाने के बावजूद लिट्टीपाड़ा प्रखंड की कर्माटांड़ पंचायत अंतर्गत सकला सिमड़ी टोला और दलदली गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर हैं। दोनों गांवों को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली करीब तीन से चार किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क बदहाल स्थिति में है। बरसात के मौसम में यह सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है।
करीब 150 की आबादी वाले सकला सिमड़ी टोला और 80 की आबादी वाले दलदली गांव के ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की जर्जर स्थिति के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने तथा किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जगह-जगह जलभराव और कीचड़ के कारण दोपहिया ही नहीं, चारपहिया वाहनों का चलना भी लगभग असंभव हो जाता है।
ग्रामीण गोले पहाड़िया, जालिया पहाड़िन, जोमे पहाड़िया, जाबरी पहाड़िन, बामना पहाड़िया और धार्मी पहाड़िन ने बताया कि वर्षों से सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग की जा रही है। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष समस्या रखी गई, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। नतीजतन दोनों गांव आज भी विकास की बाट जोह रहे हैं।
दलदली गांव के प्रधान मंगल हांसदा ने कहा कि हर चुनाव के समय जनप्रतिनिधि गांव में आकर सड़क, पेयजल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन देते हैं। ग्रामीण हर बार लोकतंत्र पर भरोसा जताते हुए मतदान भी करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही सभी वादे भुला दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि न प्रशासन उनकी सुनता है और न ही जनप्रतिनिधि, जिससे ग्रामीणों में निराशा बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की बात करती है, लेकिन आदिम जनजातीय बहुल इन गांवों में सड़क और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। उनका आरोप है कि आदिवासी गांव केवल चुनावी वादों तक ही सीमित होकर रह गए हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि सकला सिमड़ी टोला से दलदली गांव तक शीघ्र पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि दोनों गांवों के लोगों को आवागमन की समस्या से राहत मिल सके और वे शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हुए विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
