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मासूम का शव, पास खड़ा हाथी और चीखता गांव, कोल्हान में मानव-वन्यजीव संघर्ष चरम पर, मझगांव में और दो की दर्दनाक मौत

रिपोर्ट: MANISH 20 घंटे पहलेझारखण्ड

पश्चिमी सिंहभूम से सरायकेला तक हाथियों का कहर, मौत और फसल तबाही के बीच वन विभाग कटघरे में

मासूम का शव, पास खड़ा हाथी और चीखता गांव, कोल्हान में मानव-वन्यजीव संघर्ष चरम पर, मझगांव में और दो की दर्दनाक मौत

सरायकेला : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों में जंगली हाथियों का बढ़ता आतंक अब गंभीर मानव संकट का रूप ले चुका है। बावजूद इसके वन विभाग की उदासीनता और नियमों की अनदेखी लगातार सवालों के घेरे में है। ताजा मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड अंतर्गत झारखंड-ओडिशा सीमा स्थित बेनीसागर गांव का है जहां जंगली हाथी ने दो लोगों को पटक कर मार डाला। मृतकों में 40 वर्षीय प्रकाश मालवा और एक नाबालिग बच्चा शामिल है। घटना के बाद हाथी बच्चे के शव के पास खड़ा रहा जिससे इलाके में दहशत फैल गई। सूचना मिलने पर वन विभाग और मझगांव थाना की पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन तब तक जान जा चुकी थी। स्थानीय लोगों के अनुसार बीते एक सप्ताह में हाथी हमलों से अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा अपने आप में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 तथा राज्य सरकार की मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन योजना के तहत हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सतत गश्ती, अलर्ट सिस्टम, रैपिड रिस्पॉन्स टीम और ग्रामीणों को समय पर चेतावनी देना अनिवार्य है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन नियमों का प्रभावी पालन कहीं नजर नहीं आ रहा।

दूसरी ओर सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल वन रेंज अंतर्गत कुकड़ू प्रखंड में भी हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। कुकड़ू पंचायत के बेरासिसिरुम गांव के रूपरु टोला और खैरकोचा क्षेत्र में बीते कई दिनों से हाथियों की आवाजाही से ग्रामीण भयभीत हैं। बीती रात हाथियों ने मिहिर महतो, बालिका महतो और गौतम महतो की आलू की फसल को पूरी तरह रौंद डाला। इसके अलावा सुरेन महतो की बांधागोभी और नरेंद्र नाथ महतो की धान की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों की महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में नष्ट हो गई जिससे उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को कई बार हाथियों की आवाजाही की सूचना दी गई लेकिन न तो गश्ती बढ़ाई गई और न ही हाथियों को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर खदेड़ने की कोई ठोस पहल हुई। नियमों के अनुसार फसल क्षति और जनहानि की स्थिति में त्वरित मुआवजा देना वन विभाग की जिम्मेदारी है लेकिन पीड़ित किसानों और परिजनों को अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। लगातार हो रही मौतों और फसल नुकसान से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग ने शीघ्र गश्ती, रात्रि निगरानी, हाथी कॉरिडोर प्रबंधन और त्वरित मुआवजा वितरण सुनिश्चित नहीं किया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि वन विभाग नियमों के अनुरूप जिम्मेदारी निभाता है या हाथी आतंक यूं ही जान और आजीविका लीलता रहेगा।

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