ताज़ा-ख़बर

ठीक हो सकता है सफेद दाग, छिपायें नहीः डॉ सरोज राय

रिपोर्ट: VBN News Desk6 घंटे पहलेझारखण्ड

विश्व विटिलिगो दिवस-25 जून पर विशेष

ठीक हो सकता है सफेद दाग, छिपायें नहीः डॉ सरोज राय

सफेद दाग (विटिलिगो) बीमारी को हमारे समाज में आमतौर पर छुआछूत से जोड़कर देखा जाता है. अज्ञानता की वजह से कुछ लोग इसे कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) भी समझ लेते हैं. कई बार सफेद दाग की वजह से मरीज और उसके परिवार को भी सामाजिक भ्रांतियों में पड़कर नौकरी, शादी-विवाद आदि में परेशानी उठानी पड़ती है. विश्व विटिलिगो दिवस पर झारखंड की सुप्रसिद्ध चर्मरोग विशेषज्ञ सह कॉस्मेटिक सर्जन डॉ सरोज राय कहती हैं कि जब इंसान के शरीर में रंग बनानेवाली कोशिकाएं विपरीत अवस्था में कार्य करने लगते हैं, तो त्वचा पर सफेद दाग दिखाई देने लगते हैं.

वर्षों पहले इसे श्वेत कुष्ठ माना जाता था. लोग मरीज से दूरी बनाना शुरू कर देते थे, जबकि यह गलत है. सफेद दाग छुआछूत की बीमारी नहीं है और न ही यह किसी तरह का कुष्ठ है. अगर मरीज जल्दी डॉक्टर के पास पहुंचता है, तो उसका पूरी तरह उपचार हो सकता है. सफेद दाग के प्रति इसी भ्रांति को दूर करने के लिए प्रतिवर्ष 25 जून को विश्व विटिलिगो दिवस मनाया जाता है. डॉ सरोज राय ने बताया कि पूरी दुनिया में 2 प्रतिशत और भारत में तीन से पांच प्रतिशत लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं. 10 वर्ष के बच्चों से लेकर 30 साल तक के लोगों में यह रोग ज्यादा पाया जाता है. यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है. डॉ राय कहती हैं कि इस रोग को छिपायें नहीं, बल्कि जल्द से जल्द चिकित्सक को दिखायें. दवाओं और सर्जरी से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है.

डॉ राय का कहना है कि सफेद दाग त्वचा की ऑटो इम्यून बीमारी है जिसका संबंध मेलेनिन नामक पिगमेंट से है, जो हमारी त्वचा के रंग के लिए जिम्मेदार है. मेलेनिन मेलेनोसाइट नामक कोशिका से बनता है. ऑटो इम्यून बीमारी में शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली इस कोशिका को नष्ट करने लगती है और मेलेलिन का बनना धीरे-धीरे बंद होने लगता है. शरीर के जिस स्थान पर यह असर करता है वहां की चमड़ी सफेद होने लगती है, जिसे हम सफेद दाग, विटिलिगो अथवा ल्यूकोडर्मा के नाम से जानते हैं. यह बीमारी क्यों होती है, इसका आज तक ठीक-ठीक पता नहीं लगाया जा सका है.

विटिलिगो के लक्षण *शरीर के किसी भी भाग में त्वचा का रंग हल्का पड़ना अथवा सफेद होना. *प्रभावित स्थान पर खुजली होना. *चोट, जलने, छिलने के बाद चमड़ी का रंग सफेद हो जाना. *शरीर, सिर एवं भौंहों के बाल का सफेद होना. *तिल के आसपास सफेद घेरा बनना.

इलाज

*दवा, सिंकाई, सर्जरी आदि से सफेद दाग को ठीक किया जा सकता है.

*शुरुआती दौर में खानेवाली दवा से इसे ठीक किया जाता है.

  • पुराने मामलों में पंच ग्राफ्टिंग, स्किन ग्राफ्टिंग, मेलेनेसाइट ग्राफ्टिंग जैसे सर्जिकल उपायों की मदद ली जाती है.

  • टैटू बना कर भी कुछ मरीजों के दाग छुपाये जाते हैं.

  • अल्ट्रॉवायलेट-बी (यूवीबी) से सिंकाई, पीआरपी ट्रीटमेंट आदि से भी कई मरीजों को फायदा मिला है.

इन्हें भी पढ़ें.