तिसरी के एफसीआई गोदाम में 31 क्विंटल चना दाल सड़ा, गरीबों का हक कीड़ों के हवाले
तिसरी के एफसीआई गोदाम में 31 क्विंटल चना दाल सड़ा, गरीबों का हक कीड़ों के हवाले

सरकार भेजे अनाज पर पदाधिकारी के लापरवाही के कारण गोदाम में सड़ रहा राशन गिरिडीह : गरीबों के लिए राशन भेजकर सरकार और प्रशासन चाहे जितने दावे कर लें, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड मुख्यालय स्थित एफसीआई गोदाम में एक बार फिर गरीबों के हक का अनाज भारी मात्रा में सड़ने का मामला सामने आया है। शुक्रवार को झामुमो के प्रखंड अध्यक्ष रिंकू बर्णवाल द्वारा किए गए गोदाम निरीक्षण के दौरान वहां 31 क्विंटल से ज्यादा चना दाल सड़ा हुआ पाया गया। दाल में कीड़े भी लग चुके हैं। "सरकार को बदनाम करने की साजिश:रिंकू " झामुमो प्रखंड अध्यक्ष रिंकू बर्णवाल ने इसे सीधे पदाधिकारियों की लापरवाही करार दिया। उन्होंने कहा, "सरकार गरीबों के लिए अनाज भेजती है, लेकिन पदाधिकारियों की लापरवाही के कारण यह अनाज गोदाम में ही सड़ रहा है। ये सरकार को बदनाम करने की साजिश है।" उन्होंने उपायुक्त से मामले में संज्ञान लेकर तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। एमओ का पक्ष: पहले ही दे चुके हैं सूचना वहीं मौके पर मौजूद प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी अभिजीत कुमार ने बताया कि दाल की गुणवत्ता उनके प्रभार लेने से पहले ही खराब होने लगी थी। एमओ अभिजीत कुमार के मुताबिक उन्होंने जुलाई माह में ही जिला आपूर्ति पदाधिकारी को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दे दी थी। पत्र में 31.58 क्विंटल चना दाल, 3 क्विंटल चीनी और 542 क्विंटल नमक के अधिक समय से भंडारित रहने के कारण गुणवत्ता प्रभावित होने की बात लिखी गई थी। साथ ही उक्त सामग्री के शीघ्र उठाव और निष्पादन की दरखास्त भी की गई थी ताकि सरकारी संपत्ति की क्षति न हो। उन्होंने बताया कि गोदाम में अभी भी 3 क्विंटल चीनी स्टॉक में है, जिसकी जांच के लिए विभागीय टीम आने वाली है। वहीं मामले को लेकर जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने बताया कि तिसरी सहित कई प्रखंडो से सामग्री भंडारण की सुचना मिली है। विभाग को एस ई ओ के लिए भेजा गया है, एस ई ओ जनरेट नहीं होने के कारण मामले का निष्पादन नहीं किया जा सका है। सुचना देने के बावजूद विभागीय पदाधिकारी "कुंभकर्णी नींद" में सोते रहे, जिसका नतीजा ये हुआ कि 31 क्विंटल से अधिक चना दाल पूरी तरह खराब हो गई। एक तरफ सरकार गरीब कल्याण की बात करती है, दूसरी तरफ गोदामों में राशन सड़ रहा है। सूचना देने के बाद भी कार्रवाई न होना सिस्टम की लापरवाही को उजागर करता है।