वन अधिकार कानून के समर्थन में 10 दिवसीय पदयात्रा बेतला पहुंची, ग्रामीणों ने वन विभाग कार्यालय का किया घेराव
ग्राम सभा की अनुमति के बिना टाइगर सफारी योजना का विरोध, लंबित वन अधिकार दावों के निष्पादन की मांग

बरवाडीह, लातेहार : वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन में कथित अनदेखी और ग्राम सभाओं के अधिकारों की बहाली की मांग को लेकर संयुक्त ग्राम सभा मंच बरवाडीह के नेतृत्व में निकाली जा रही 10 दिवसीय पदयात्रा मंगलवार को तीसरे दिन बेतला पहुंची। यहां ग्रामीणों ने बेतला फॉरेस्ट रेंज ऑफिस का घेराव कर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर वन विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। यह पदयात्रा 8 मार्च 2026 को मंडल गांव से शुरू हुई है और 17 मार्च तक विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए जिला मुख्यालय लातेहार पहुंचेगी। यात्रा मंडल से निकलकर बरवाडीह और बेतला तक पहुंच चुकी है तथा आगे छिपादोहर, गारू और सरयू होते हुए लातेहार पहुंचेगी। पदयात्रा का उद्देश्य ग्रामीणों और ग्राम सभाओं को फॉरेस्ट राइट्स एक्ट 2006 के प्रावधानों के प्रति जागरूक करना और सरकार से इसके सही क्रियान्वयन की मांग करना है। पदयात्रा कार्यक्रम का नेतृत्व बरवाडीह पूर्वी के जिला परिषद सदस्य कन्हाई सिंह और समाजसेवी श्यामली शर्मा कर रहे हैं। बेतला वन क्षेत्र कार्यालय के घेराव के दौरान आयोजित सभा में वक्ताओं ने वन अधिकारों से जुड़े कई मुद्दों को उठाया। सभा को संबोधित करते हुए श्यामली शर्मा ने कहा कि पुटुवागढ़ क्षेत्र में ग्राम सभा की स्वीकृति के बिना टाइगर सफारी योजना शुरू कर दी गई है जो पेसा कानून की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि जब पेसा कानून लागू है तो किसी भी परियोजना को शुरू करने से पहले ग्राम सभा की अनुमति लेना अनिवार्य है। ग्रामीणों ने मांग पत्र में बताया कि लातेहार जिले में ग्राम सभाओं द्वारा कुल 7384 वन अधिकार दावे प्रस्तुत किए गए थे जिनमें से 3599 दावे अभी भी जिला प्रशासन के पास लंबित हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई मामलों में अधिकार पत्र जारी करते समय क्षेत्रफल में कटौती की गई है और सामुदायिक अधिकार भी अधूरे दिए गए हैं। मांग पत्र में उत्तर कोयल जलाशय (मंडल डैम), हिरण पार्क, ग्रास प्लॉट निर्माण और टाइगर सफारी जैसी परियोजनाओं के नाम पर ग्रामीणों को उनके पारंपरिक अधिकारों से वंचित करने का आरोप भी लगाया गया। ग्रामीणों ने लंबित सामुदायिक एवं व्यक्तिगत वन अधिकार दावों के निष्पादन, ग्राम सभाओं को वन उपज पर अधिकार देने और ग्रामीणों पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमों को वापस लेने की मांग की। इस दौरान ग्रामीणों ने एक खेत नहीं, एक पेड़ नहीं - सारा जंगल ग्राम सभा का है जैसे नारों के साथ जल, जंगल और जमीन पर ग्राम सभा के अधिकार सुनिश्चित करने की मांग उठाई। पदयात्रियों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) के नाम संबोधित मांग पत्र बेतला के प्रभारी वनपाल संतोष कुमार सिंह को सौंपा। इस मौके पर रामजनम सिंह, भोलेनाथ सिंह, बिनोद सिंह, महिंदर सिंह, राजू उरांव, पविता कुंभारा, सविता कुमारी, मोहन सिंह, रीता देवी, चिन्नावणी देवी, रेखा कुमारी, सरिता कुमारी, शादेवी, रजन्ती देवी और जीरा देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।