विधायक निधि विवाद में नया मोड़, जेई भीम चंद्र महतो ने दस्तावेज दिखाकर आरोपों को बताया भ्रामक
निजी स्वार्थ में बनाई गई खबर, लघु सिंचाई विभाग ने विधायक अनुशंसा और आदेश पत्र के आधार पर दी सफाई

सरायकेला : ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में विधायक निधि से संचालित योजनाओं को लेकर सामने आए कथित फर्जी भुगतान विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। सोमवार को प्रकाशित खबर के बाद लघु सिंचाई प्रमंडल, सरायकेला-खरसावां के जूनियर इंजीनियर (जेई) भीम चंद्र महतो सामने आए और विधायक सविता महतो के अनुशंसा पत्र तथा विकास शाखा, समाहरणालय द्वारा जारी आदेश पत्र की प्रतियां दिखाते हुए पूरे मामले को भ्रामक और तथ्यों से परे बताया। जेई भीम चंद्र महतो ने कहा कि पत्रकार और आरटीआई कार्यकर्ता बसंत कुमार साहू द्वारा निजी स्वार्थ सिद्धि और व्यक्तिगत उद्देश्य से तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर खबर प्रकाशित करवाई गई है। उन्होंने दावा किया कि जिन योजनाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं वे योजनाएं बाद में संशोधित और प्रतिस्थापित कर दी गई थीं जिसकी पूरी प्रक्रिया सरकारी आदेश और विधायक की लिखित अनुशंसा के तहत हुई। विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार ईचागढ़ विधायक सविता महतो ने 9 जनवरी 2024 को पत्रांक 860/DDC/2024 के माध्यम से पूर्व स्वीकृत कुछ योजनाओं को रद्द कर नई योजनाओं की अनुशंसा की थी। इसमें चांडिल प्रखंड के मुसरीबेड़ा गांव में संजय कुमार महतो के निजी तालाब जीर्णोद्धार योजना को भी रद्द करने का उल्लेख किया गया है। इसके बाद समाहरणालय, सरायकेला-खरसावां की विकास शाखा द्वारा 15 फरवरी 2024 को जारी आदेश पत्र में भी पूर्व स्वीकृत योजनाओं को निरस्त कर नई योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति देने की बात दर्ज है। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि पूर्व स्वीकृत योजनाओं के विरुद्ध निर्गत राशि का समायोजन नई स्वीकृत योजनाओं में किया जाएगा। जेई भीम चंद्र महतो का कहना है कि समाचार में यह तथ्य प्रमुखता से नहीं रखा गया कि संबंधित योजना बाद में निरस्त कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रक्रिया के तहत विधायक अनुशंसा, प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी अनुमति और राशि समायोजन की कार्रवाई की गई थी। ऐसे में अस्तित्वहीन तालाब के नाम पर फर्जी भुगतान की बात कहना विभागीय प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रस्तुत करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग विभाग और जनप्रतिनिधियों की छवि खराब करने के उद्देश्य से अधूरी जानकारी के आधार पर खबरें चला रहे हैं। जेई ने कहा कि यदि किसी योजना को बाद में निरस्त या परिवर्तित किया जाता है तो उससे संबंधित राशि का समायोजन नियमानुसार अन्य स्वीकृत योजनाओं में किया जाता है जो सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि दूसरी ओर आरटीआई कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार बसंत कुमार साहू अपने दावों पर कायम हैं। उनका कहना है कि आरटीआई के माध्यम से जो जानकारी प्राप्त हुई उसमें स्पष्ट रूप से भुगतान और योजना का विवरण दर्ज था। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।