प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती महिला को सड़क के अभाव मे खाट पर लाद मुख्य सड़क तक लाया
गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को खाट का लिया सहारा

Amit Sahay सड़क के अभाव ने एक बार फिर ग्रामीण व्यवस्था की बदहाली को हुआ उजागर
पीरटांड़ प्रखंड (मधुबन थाना क्षेत्र) का दालुवाडीह गांव गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र संख्या - 32) के अंतर्गत आता है।
गिरिडीह: झारखंड के गिरिडीह जिले के पीरटांड़ इलाका मे आजादी के 75 वर्ष बाद भी कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सूबे की सरकार मे विकास के सभी दावो का पोल खोल दी है। सरकार पर उठे प्रश्न। एक मामला पीरटांड़ प्रखंड के मधुबन थाना क्षेत्र अंतर्गत दालुवाडीह गांव का है, जहां प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को खाट का सहारा लेना पड़ा। सड़क के अभाव ने एक बार फिर ग्रामीण व्यवस्था की बदहाली को उजागर कर दिया है। विकास के सारे दावे खोखले नजर आ रही है। पीरटांड़ प्रखंड का दालुवाडीह गांव गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र संख्या - 32) के अंतर्गत आता है। जहाँ सड़क के अभाव मे महिला को करीब चार किलोमीटर तक उबड़-खाबड़ रास्तों से पैदल ढोकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया गया है, तब जाकर उसे अस्पताल लाया जा सका। स्थानीय लोगो ने बताया कि पीरटांड़ प्रखंड के मधुबन थाना क्षेत्र अंतर्गत दालुवाडीह गांव निवासी सुनीता सोरेन को शुक्रवार सुबह अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुआ। परिजनों ने तत्काल स्वास्थ्य विभाग और एंबुलेंस सेवा को इसकी सूचना दी, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने का हवाला देते हुए एंबुलेंस कर्मियो ने गांव में आने से इंकार कर दिया। जिसके बाद परिवार के सदस्यो एवं ग्रामीण के लोगो ने मिलकर सुनीता सोरेन को खाट पर लिटाया और कठिन रास्तों से करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर पिपराडीह मुख्य सड़क तक पहुंचाया। सड़क पर वाहन की व्यवस्था कर उन्हें नजदीकी अस्पताल भेजा गया। ग्रामीणों को इस दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कच्चे और पथरीले रास्ते, बारिश के कारण कीचड़ ने राह को ओर मुश्किल बना दिया। इधर ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध रहती, तो गर्भवती महिला को इस तरह जान जोखिम में डालकर अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता।