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जमालपुर भूमि विवाद में अमित सिंह का पलटवार, बोले- 600 स्क्वायर फीट खरीदने वाला भू-माफिया कैसे?

रिपोर्ट: MANISH 5 घंटे पहलेझारखण्ड

नापी से क्यों भाग रहे हैं अशोक सिंह? जमीन विवाद में ऑडियो, फर्जी बिक्री और बाउंड्री तोड़ने के आरोपों से बढ़ा विवाद

जमालपुर भूमि विवाद में अमित सिंह का पलटवार, बोले- 600 स्क्वायर फीट खरीदने वाला भू-माफिया कैसे?

गम्हरिया : सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया अंचल अंतर्गत जमालपुर सतबोहनी क्षेत्र में चल रहे भूमि विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। जमीन हड़पने और भू-माफिया होने के आरोपों के बाद अमित कुमार सिंह ने अपने सहयोगी शशिकांत पासवान के साथ प्रेस वार्ता कर आरोप लगाने वालों पर पलटवार किया। अमित सिंह ने सभी आरोपों को बेबुनियाद, दुर्भावनापूर्ण और व्यक्तिगत रंजिश से प्रेरित बताया। प्रेस वार्ता में अमित सिंह ने कहा कि उन्होंने केवल 600 स्क्वायर फीट जमीन खरीदी है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी छोटी जमीन खरीदने वाला व्यक्ति भू-माफिया कैसे हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अशोक सिंह खुद जमीन मामलों में बिचौलिये की भूमिका निभाते हैं और कई लोगों से अवैध वसूली करते रहे हैं। अमित सिंह ने दावा किया कि अशोक सिंह द्वारा उनसे और उनके सहयोगी रोहित चौधरी से 50 हजार से एक लाख रुपये तक की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि इसके ऑडियो प्रमाण भी उनके पास मौजूद हैं। पैसे नहीं देने के कारण ही उनके खिलाफ लगातार झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अशोक सिंह ने आरती देवी नामक महिला को कथित रूप से फर्जी तरीके से लगभग 1300 स्क्वायर फीट जमीन 26 लाख रुपए में बेच दी जबकि वह जमीन दूसरे रैयतदार की बताई जा रही है। अमित सिंह के अनुसार अब न तो महिला को कब्जा दिया जा रहा है और न ही पैसे लौटाए जा रहे हैं। रास्ता बंद करने के आरोपों पर सफाई देते हुए अमित सिंह ने कहा कि जिस इलाके में हजारों लोग वर्षों से रह रहे हैं वहां रास्ता बंद होने का आरोप पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि विवादित जमीन की सरकारी नापी दो बार कराई जा चुकी है और अंचल कार्यालय से प्रमाणित दस्तावेज भी मौजूद हैं। इसके बावजूद संबंधित पक्ष नापी से बच रहा है। वहीं शशिकांत पासवान ने कहा कि वे वैधानिक प्रक्रिया के तहत वर्षों से जमीन से जुड़े कार्य कर रहे हैं और लगभग 500 से 1000 परिवारों को बसाने का काम किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग निजी स्वार्थ और अवैध वसूली के लिए उनकी छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी अनुपस्थिति में बाउंड्री वॉल तोड़ी गई जिसकी लिखित शिकायत थाना में दर्ज कराई गई है। वीडियो और फोटो साक्ष्य भी प्रशासन को सौंपे गए हैं। नियमों के अनुसार किसी भी भूमि विवाद में अंचल कार्यालय की सरकारी नापी, रैयती दस्तावेज, खतियान और रजिस्ट्री रिकॉर्ड को ही वैध आधार माना जाता है। ऐसे मामलों में बिना जांच किसी को दोषी ठहराना कानूनन उचित नहीं माना जाता। अमित सिंह और शशिकांत पासवान ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि वे दोषी पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई स्वीकार करेंगे लेकिन झूठे आरोप साबित होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ मानहानि और आपराधिक षड्यंत्र के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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