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गम्हरिया अंचल कार्यालय के मुख्य द्वार के समीप सरकारी जमीन पर निर्माण का आरोप, कार्रवाई के बजाय शिकायत का इंतजार?

रिपोर्ट: MANISH 14 घंटे पहलेझारखण्ड

पहले रुक चुका था निर्माण, फिर शुरू हुआ दुकान का काम, अंचल प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

गम्हरिया अंचल कार्यालय के मुख्य द्वार के समीप सरकारी जमीन पर निर्माण का आरोप, कार्रवाई के बजाय शिकायत का इंतजार?

गम्हरिया : सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर के मुख्य द्वार के समीप सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण कर दुकान निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि इसी स्थान पर पूर्व में पक्का दुकान निर्माण का काम तत्कालीन सीओ मनोज कुमार के हस्तक्षेप के बाद रुकवाया गया था। अब दोबारा निर्माण कार्य शुरू होने और सीतारामपुर ग्राम मतस्यजीवी सहयोग समिति लिमिटेड, सीतारामपुर गम्हरिया तथा झारखंड फ्रेश फीस मछली बिक्री केन्द्र का बोर्ड लगाए जाने की सूचना है। मामले में अंचल कार्यालय के बड़ा बाबू तरुण ठाकुर से पूछे जाने पर कथित तौर पर कहा गया कि बिना शिकायत के कार्रवाई नहीं की जा सकती। उन्होंने शिकायतकर्ताओं को समाचार प्रकाशित करने की सलाह देते हुए कहा कि खबर के माध्यम से डीसी के संज्ञान में मामला आने पर कार्रवाई हो सकती है। यह कथित जवाब अंचल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है क्योंकि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण की सूचना केवल लिखित शिकायत तक सीमित रहने की बात नियमों की भावना पर सवाल पैदा करती है।

नियम क्या कहते हैं

झारखंड पब्लिक लैंड एन्क्रोचमेंट एक्ट, 1956 में सार्वजनिक भूमि पर अनधिकृत कब्जे में भवन या अन्य संरचना खड़ी करना भी अतिक्रमण की परिभाषा में शामिल है। कानून की धारा 3 के तहत कलेक्टर को आवेदन के अलावा किसी भी स्रोत से मिली सूचना के आधार पर अतिक्रमण की जांच/कार्यवाही शुरू करने का अधिकार है। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को नोटिस, जवाब का अवसर और सुनवाई की प्रक्रिया का प्रावधान है।

ऐसे में पूरे मामले में भूमि की प्रकृति, खाता-प्लॉट, सीमांकन, निर्माण की अनुमति और दुकान लगाने की वैधता की जांच जरूरी है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यदि जमीन वास्तव में सरकारी है तो सूचना मिलने के बावजूद अब तक कौन-सी कार्रवाई की गई है। साथ ही संबंधित पक्ष के पास वैध आवंटन या अनुमति है तो उसका रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

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