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बोकारो वन भूमि घोटाला: ईडी ने 500 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का किया खुलासा, सीआईडी की जांच पर उठे सवाल

रिपोर्ट: VBN News Desk4 दिन पहलेझारखण्ड

प्रतुल शाहदेव बोले-संगठित भ्रष्टाचार का बड़ा नेटवर्क उजागर; रामेश्वर उरांव के पुराने बयान का दिया हवाला

बोकारो वन भूमि घोटाला: ईडी ने 500 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का किया खुलासा, सीआईडी की जांच पर उठे सवाल

रांची। बोकारो वन भूमि घोटाले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि इस मामले में सामने आ रहे तथ्य झारखंड में व्याप्त संगठित भ्रष्टाचार की गहराई और गंभीरता को उजागर करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर हलफनामे में 500 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा होना इस बात का प्रमाण है कि यह कोई साधारण अनियमितता नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित आर्थिक अपराध है।

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि शुरुआत में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद जांच सीआईडी को सौंपी गई। हालांकि, सीआईडी की जांच की रफ्तार बेहद धीमी और सीमित रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सीआईडी महीनों की जांच के बाद भी केवल राजबीर कंस्ट्रक्शन के 3-4 करोड़ रुपये के लेन-देन तक ही पहुंच सकी। इसके विपरीत, ईडी ने कम समय में पूरे नेटवर्क का खुलासा करते हुए 500 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश कर दिया।

उन्होंने कहा कि ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि शेल कंपनियों और रसूखदार खरीदारों के माध्यम से वन भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त की गई। इस पूरे प्रकरण में कई स्तरों पर एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जिसमें बिचौलिये, अधिकारी और प्रभावशाली लोग शामिल थे।

प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि उरांव स्वयं विधानसभा में कह चुके हैं कि जिन मामलों को सरकार लटकाना या भटकाना चाहती है, उन्हें एसीबी और सीआईडी को सौंप दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बोकारो घोटाले में यह बात पूरी तरह सही साबित होती दिख रही है।

उन्होंने सवाल उठाया कि 500 करोड़ रुपये के इस कथित महाघोटाले में जांच का दायरा केवल निचले स्तर के अधिकारियों, जैसे सीओ, तक ही क्यों सीमित किया जा रहा है। क्या इतने बड़े घोटाले में उच्च अधिकारी, राजनीतिक संरक्षण और सत्ता से जुड़े लोग शामिल नहीं हैं? यदि नहीं, तो उन्हें बचाने की कोशिश क्यों की जा रही है?

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि झारखंड में भ्रष्टाचार लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। बोकारो वन भूमि घोटाला इसका एक उदाहरण है, जो सरकार की नीयत, नीति और प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है।

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