मॉरीशस के पूर्व उप प्रधानमंत्री की बेटी दामाद के भारत आगमन पर चतरा कुशवाहा समाज ने किया स्वागत
बुद्धू महतो भारत नहीं लौट पाए और मॉरीशस के ही होकर रह गए।

चतरा जिला दांगी कुशवाहा महासभा के मुख्य संरक्षक राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक डॉ देवचरण दांगी एवं महासभा के राज्य सचिव प्रोफेसर श्याम सुंदर प्रसाद के नेतृत्व में कुशवाहा समाज का एक दल बड़कागांव के सिमरातरी गांव पहुंचकर मॉरीशस के पूर्व उप प्रधानमंत्री डॉ हरीश बुद्धू की बेटी डॉ सचिता बुद्धू और दामाद अजय बुद्धू का भव्य स्वागत किया। यह दंपति भारत भ्रमण के क्रम में सिमरातरी गांव पहुंचा था जहां से 200 वर्ष पहले उनके पूर्वज बुद्धू महतो को अंग्रेज बहला फुसलाकर मजदूरी के लिए मॉरीशस ले गये थे ।

बुद्धू महतो भारत नहीं लौट पाए और मॉरीशस के ही होकर रह गए।जब बुद्धू महतो का पोता डॉक्टर हरीश बुद्धू मॉरीशस के उप प्रधानमंत्री बने तब उन्होंने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और झारखंड के मुख्यमंत्री लालू यादव से अपने पूर्वजों के गांव को ढूंढ निकालने का आग्रह किया था। दोनों के पहल पर ही यह पता लग सका कि डॉक्टर हरीश बुद्धू जो मॉरीशस के उप प्रधानमंत्री थे, उनका पूर्वज बड़कागांव प्रखंड के सिमरातरी गांव के रहने वाले थे। इस जानकारी के बाद ही डॉक्टर हरीश बुद्धू वर्ष 1986 और फिर वर्ष 1991 में अपनी पत्नी सरिता बुद्धू के साथ भारत का दौरा कर अपने पूर्वज के गांव सिमरातरी पहुंचे और अपने वंशज के लोगों से मिलकर अपार प्रसन्नता जाहिर की थी। 35 वर्षों के बाद डॉक्टर हरीश बुद्धू की बेटी और दामाद पूर्वजों की इस धरती को नमन करने के लिए जब मॉरीशस से बड़कागांव के सिमरातरी गांव पहुंचे तो ग्रामीण की खुशी का ठिकाना ना रहा। हरीश बुद्धू के बेटी और दामाद का यह दौरा उनकी विरासत और भावनात्मक जुड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीण और उनके वंशज के लोग उनके स्वागत के लिए गजेबाजे के साथ सड़क पर उतर आए । उनके आने का समाचार सुनकर दांगी कुशवाहा महासभा जिला चतरा का एक दल डॉ देवचरण दांगी और प्रो श्याम सुंदर प्रसाद के नेतृत्व में सिमरातरी गांव पहुंचा और स्वागत समारोह में विदेशी दंपति का स्वागत किया। स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए डॉ देवचरण दांगी ने कहा कि बड़कागांव के सिमरातरी गांव से निकलकर मॉरीशस का नेतृत्व करना सिर्फ बड़का गांव के लोगों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड और भारत के लिए गौरव तथा सौभाग्य की बात है। मॉरीशस को एक छोटा भारत भी कहा जाता है, क्योंकि वहां भारतीय संस्कृति का गहरा प्रभाव है। मॉरीशस की लगभग 70% आबादी भारतीय मूल की है। श्री दांगी ने यह भी कहा कि मॉरीशस में हिंदी और भोजपुरी भाषा का व्यापक प्रचलन है । प्रोफेसर श्याम सुंदर प्रसाद ने भी इस भेंट को अति महत्वपूर्ण बताया और विदेशी दंपति से चतरा चलने का आग्रह किया। उन्होंने एक और मॉरीशस के प्रधानमंत्री राम गुलाम जो बिहार से हैं उनकी भी चर्चा की। समारोह की अध्यक्षता बड़कागांव प्रखंड अध्यक्ष सोहनलाल मेहता ने किया। अपने अध्यक्षीय भाषण में श्री मेहता ने कहा कि मॉरीशस के पूर्व उप प्रधानमंत्री हरीश बुद्ध द्वारा 22 जनवरी 1992 को लिखी गई चिट्ठी को मैं आज भी संजोए रखा हूं । गंगा दोहर में बालिकाओं के लिए विद्यालय खोलने की प्रेरणा डॉक्टर हरीश बुद्धू ने ही दी थी । पूर्वजों की जन्मभूमि पर अपने आप को पाकर विदेशी दंपति काफी भाव विह्वल दिख रहे थे। पूर्वजों के वंशज से मिलकर वे काफी गौरांवित भी महसूस कर रहे थे। अपने स्वागत से अभीभूत होकर सचिता बुद्धू ने कहा कि 2 नवंबर को मॉरीशस में अप्रवासी दिवस मनाया जाता है आप सभी उस मौके पर सादर आमंत्रित है। मैं आप सभी को नेवता देती हूं । मैं आपको मॉरीशस में स्वागत कर फुले नहीं समाऊंगी । सचिता बुद्धू और अजय बुद्धू ने भद्रकाली मंदिर इटखोरी, रजरप्पा मंदिर रामगढ़ और बुढवा महादेव मंदिर बड़कागांव में जाकर पूजा अर्चना करने का काम भी किया। स्वागत समारोह में चतरा के जितेंद्र प्रसाद, ग्राम देहर निवासी वीरेंद्र कुमार , सीमरातरी के निवासी राम लखन महतो, दिलीप कुमार, देवनाथ महतो, केदार प्रसाद दांगी, दिलीप कुमार, कमल कुमार, योगेंद्र महतो ,अजय कुमार राम, ईश्वर महतो, लखन महतो ,कैलाश महतो, दौलत महतो, अशोक महतो, सुरेंद्र प्रसाद दांगी, दीपक महतो, कंचन महतो, तिलानाथ महतो, अरुण महतो और रामू महतो के साथ ही साथ सैकड़ो की संख्या में माताएं और बहनें तथा प्रबुद्ध ग्रामीण उपस्थित थे।