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फॉरेस्ट विभाग की एनओसी बिना सड़क निर्माण पर संवेदक व अभियंता के खिलाफ केस, कार्य पर तत्काल रोक

रिपोर्ट: VBN News Desk1 घंटे पहलेझारखण्ड

स्थानीय लोगों ने भी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया है।

फॉरेस्ट विभाग की एनओसी बिना सड़क निर्माण पर संवेदक व अभियंता के खिलाफ केस, कार्य पर तत्काल रोक

Ajay Kumar

पाकुड़। अमड़ापाड़ा प्रखंड क्षेत्र के पकलो से मोरियो मालपहाड़ी गांव तक प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत प्रस्तावित 1550 मीटर लंबी सड़क के निर्माण कार्य में वन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लिए बिना वन भूमि पर अतिक्रमण और दर्जनों हरे-भरे पेड़ों को उखाड़ने एवं कटवाने का मामला सामने आया है। मामले की पुष्टि के बाद वन विभाग ने संबंधित संवेदक और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल पाकुड़ के अधीन बनने वाली इस सड़क के निर्माण के शुरुआती चरण में ही वन भूमि के अतिक्रमण तथा पेड़ों के नुकसान की शिकायत मिली थी। अमड़ापाड़ा वन प्रक्षेत्र के अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण कर विभिन्न प्लॉटों में वन भूमि अतिक्रमण और पेड़ों के नष्ट होने की पुष्टि की। इसके बाद भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत संवेदक अमित कुमार, कार्यपालक अभियंता एतवारी मंडल सहित संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं अन्य के विरुद्ध जुर्म प्रतिवेदन संख्या-03/2026 दर्ज किया गया है।

कार्यपालक अभियंता ने किया स्थल निरीक्षण

शनिवार को ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता एतवारी मंडल, जूनियर इंजीनियर मिथिलेश कुमार तथा अन्य कर्मियों के साथ निर्माण स्थल पहुंचे और सड़क का निरीक्षण किया। इस दौरान संवेदक के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

निरीक्षण के दौरान सड़क किनारे दर्जनों कटे हुए एवं जड़ से उखड़े पेड़ पाए गए। अधिकारियों ने आसपास के ग्रामीणों से भी सड़क की उपयोगिता पर चर्चा की। ग्रामीणों ने सड़क को क्षेत्र के लिए आवश्यक और जनहितकारी बताया। पहाड़ी क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए सड़क को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने पर भी चर्चा हुई।

निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत में कार्यपालक अभियंता एतवारी मंडल ने कहा कि पेड़ों की कटाई "जाने-अनजाने" में हुई है। उन्होंने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सड़क निर्माण में कितनी और कहां-कहां वन भूमि प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण शुरू होने से पहले वन विभाग की ओर से सीमांकन संबंधी कोई स्पष्ट चिन्ह नहीं लगाए गए थे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वन अधिकार समिति का विधिवत गठन होने तथा वन विभाग से आवश्यक एनओसी प्राप्त होने तक सड़क निर्माण कार्य पूरी तरह बंद रहेगा। सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही निर्माण कार्य पुनः शुरू किया जाएगा। साथ ही नष्ट हुए पेड़ों के बदले पौधारोपण भी कराया जाएगा।

पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि सड़क विकास की आधारभूत आवश्यकता है, विशेषकर प्रधानमंत्री जनमन योजना जैसी योजनाएं विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। लेकिन विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी और वन संरक्षण नियमों का उल्लंघन गंभीर चिंता का विषय है।

जहां एक ओर सरकार और वन विभाग हर वर्ष पर्यावरण संरक्षण एवं वनीकरण पर बड़ी राशि खर्च करते हैं, वहीं दूसरी ओर बिना आवश्यक अनुमति के पेड़ों की कटाई और वन भूमि पर अतिक्रमण पर्यावरणीय संतुलन के लिए खतरा पैदा करता है। स्थानीय लोगों ने भी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया है।

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