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चांडिल: पुड़ीसीली जमीन विवाद में एसडीएम की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल, संयुक्त खतियानी भूमि पर अवैध निर्माण का आरोप, खूनी संघर्ष की बढ़ी संभावना

रिपोर्ट: MANISH 5 घंटे पहलेझारखण्ड

पैतृक हक के लिए भटक रही महिला, आवेदन के बावजूद कार्रवाई नहीं, प्रशासनिक चुप्पी से बढ़ा भूमि विवाद

चांडिल: पुड़ीसीली जमीन विवाद में एसडीएम की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल, संयुक्त खतियानी भूमि पर अवैध निर्माण का आरोप, खूनी संघर्ष की बढ़ी संभावना

चांडिल : अनुमंडल अंतर्गत कपाली ओपी क्षेत्र के पुड़ीसीली गांव में संयुक्त खतियानी भूमि पर कथित अवैध निर्माण को लेकर भूमि विवाद लगातार गंभीर होता जा रहा है। खाता संख्या 166 एवं प्लॉट संख्या 352 सहित अन्य संबंधित प्लॉट्स खतियान में रघु सिंह और जसोदा सिंह के नाम संयुक्त रूप से दर्ज हैं। राजस्व अभिलेख स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि उक्त भूमि अविभाजित है और दोनों परिवारों के वंशज सह-हिस्सेदार हैं। ऐसे में किसी एक पक्ष द्वारा एकतरफा निर्माण या स्वामित्व का दावा कानूनन अवैध माना जाता है। रघु सिंह के पुत्र महा सिंह की एकमात्र संतान बिजली सिंह ने अनुमंडल पदाधिकारी सह अनुमंडल दंडाधिकारी (एसडीएम), अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारी को दिए गए लिखित आवेदन में आरोप लगाया है कि जसोदा सिंह के पुत्र अजित सिंह एवं उनके पुत्र गौर सिंह संयुक्त भूमि में हिस्सा देने से इनकार करते हुए अवैध रूप से निर्माण कार्य करा रहे हैं। आवेदन में यह भी उल्लेख है कि निर्माण कार्य रोकने की मांग के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। मामले की सूचना पर कपाली ओपी पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए दोनों पक्षों को थाना बुलाया और विवादित स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य पाए जाने पर पुलिस ने स्पष्ट निर्देश दिया कि यथास्थिति बनाए रखी जाए और किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से रोका जाए। पुलिस की इस पहल को स्थानीय लोगों ने सराहा लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद अगले ही दिन पुनः चारदीवारी निर्माण का प्रयास किया गया। पीड़िता बिजली सिंह का यह भी आरोप है कि उन्हें मौखिक धमकियां दी जा रही हैं जो कानून-व्यवस्था की दृष्टि से गंभीर विषय है। यदि आरोप सत्य हैं तो यह भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब पूरा मामला एसडीएम के संज्ञान में है तब भी विवादित भूमि पर निर्माण रोकने के लिए प्रशासनिक आदेश क्यों नहीं जारी किया गया। विधि विशेषज्ञों के अनुसार हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के तहत पुत्री को पिता की संपत्ति में पुत्र के समान अधिकार प्राप्त है। इसके अलावा संयुक्त खतियानी भूमि पर निर्माण से पूर्व आपसी बंटवारा या सक्षम न्यायालय का आदेश आवश्यक होता है। बिना विभाजन या अनुमति के निर्माण करना न केवल राजस्व नियमों का उल्लंघन है बल्कि भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दंडनीय भी हो सकता है। कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में अनुमंडल प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 अथवा अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत त्वरित निषेधाज्ञा लागू कर यथास्थिति सुनिश्चित करे। फिलहाल रघु सिंह के वंशज न्याय और निष्पक्ष प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब देखना यह है कि अनुमंडल प्रशासन कब तक हस्तक्षेप करता है और पीड़ित परिवार को कब न्याय मिल पाता है।

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