आदित्यपुर नगर निगम में JE और संवेदक की मिलीभगत से भ्रष्टाचार उजागर, स्थानीय विरोध से खुली पोल
राष्ट्रपति आगमन के नाम पर खेल, पुराने स्लैब से बिल पास कराने की कोशिश, JE और संवेदक कटघरे में

आदित्यपुर : सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम में जेई और संवेदक की कथित मिलीभगत से जुड़े एक बड़े भ्रष्टाचार का मामला सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामला राष्ट्रपति के हालिया दौरे से जुड़ा हुआ है जिसके नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग की कोशिश की गई। जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति के आगमन को लेकर आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड संख्या 31 स्थित जागृति मैदान के पास बने नाले को स्लैग से ढकने का आदेश दिया गया था। आदेश जारी होने के बावजूद न तो नाले को ढका गया और न ही निर्धारित कार्य पूरा किया गया। राष्ट्रपति का दौरा संपन्न हो गया लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य शून्य रहा। इस बीच संवेदक द्वारा भुगतान प्राप्त करने की नीयत से विभागीय जेई सुभाष यादव के साथ सांठगांठ कर वार्ड संख्या 30 में पहले से रखे गए पुराने और अनुपयोगी स्लैब को लाकर नाले पर ढकने का प्रयास किया जाने लगा। इसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से बिना कार्य किए बिल पास कराना बताया जा रहा है। जैसे ही स्थानीय लोगों को इस गड़बड़ी की भनक लगी, उन्होंने मौके पर पहुंचकर जोरदार विरोध शुरू कर दिया। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया एक सुनियोजित भ्रष्टाचार है जिसमें सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है। हंगामा बढ़ता देख मामले की सूचना तत्काल उपायुक्त को दी गई। उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम के प्रशासक को तुरंत हस्तक्षेप का निर्देश दिया। प्रशासक के आदेश पर नगर निगम के कार्यपालक अभियंता पंकज झा मौके पर पहुंचे और पूरे प्रकरण की जांच की। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि संवेदक द्वारा नियमों को ताक पर रखकर गलत तरीके से कार्य किया जा रहा था। इसके बाद कार्यपालक अभियंता ने तत्काल पुराने स्लैब को हटाने का निर्देश दिया। हालांकि जब JE सुभाष यादव की भूमिका पर सवाल उठाए गए तो कार्यपालक अभियंता इस पर साफ जवाब देने से बचते नजर आए जिससे संदेह और गहराता चला गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते विरोध नहीं होता, तो यह भ्रष्टाचार आसानी से दबा दिया जाता। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में दोषी संवेदक और जिम्मेदार JE के खिलाफ ठोस कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल नगर निगम में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और जनता की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।