घर के अंदर खड़े बिजली के पोल, सिर पर लटकते हाई टेंशन तार, गम्हरिया स्टेशन से सटे कंसारी टोला में हर पल हादसे का खतरा
सिर्फ चार फीट की सड़क, बदहाल जिंदगी - बुनियादी सुविधाओं से वंचित नीमपाड़ा के लोगों ने कहा: ना सड़क, ना सुरक्षा, फिर क्यों दें टैक्स?

आदित्यपुर : नगर निगम क्षेत्र के वार्ड-07 अंतर्गत गम्हरिया रेलवे स्टेशन से सटे नीमपाड़ा के कंसारी टोला की तस्वीर आज भी विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। आजादी के दशकों बाद भी यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। बस्ती के बीचों-बीच गुजर रहा 10 हजार वोल्ट का हाई टेंशन तार लोगों के सिर पर खतरे की तरह मंडरा रहा है। जिस बिजली खंभे पर यह तार टिका है वह एक कमजोर मिट्टी के टीले पर खड़ा है और कभी भी गिर सकता है। कई जगहों पर बिजली के पोल घरों के अंदर खड़े हैं तो तार सीधे घरों की छतों के ऊपर से गुजर रहे हैं जिससे किसी भी वक्त बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। स्थानीय निवासी शिबू गोराई ने दर्द जाहिर करते हुए कहा कि हम लोग हर दिन डर के साए में जी रहे हैं। अगर कभी तार टूट गया या खंभा गिर गया तो कई जानें जा सकती हैं। इसकी शिकायत कई बार की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं दिलीप साहू ने कहा कि नगर निगम केवल टैक्स लेने आता है लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं देता। अगर यही हाल रहा तो हम लोग टैक्स देना बंद करने पर मजबूर होंगे। सड़क की स्थिति भी बेहद दयनीय है। पूरी बस्ती में केवल चार फीट चौड़ी कच्ची सड़क है, जो एक तालाब तक जाती है। यही तालाब बस्ती के लोगों के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। बरसात के दिनों में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल
बिजली अधिनियम और सुरक्षा मानकों के अनुसार हाई टेंशन तारों को आबादी वाले क्षेत्रों से सुरक्षित दूरी पर रखना अनिवार्य है। साथ ही किसी भी आवासीय क्षेत्र में बिजली के खंभे और तार इस प्रकार नहीं होने चाहिए कि वे सीधे घरों के ऊपर से गुजरें या खतरा पैदा करें। लेकिन कंसारी टोला में इन सभी नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। इसके अलावा शहरी विकास के मानकों के तहत प्रत्येक बस्ती में पर्याप्त चौड़ाई की सड़क, सुरक्षित पेयजल व्यवस्था और समुचित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना नगर निकाय की जिम्मेदारी होती है। यहां इन बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव साफ दिखाई देता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम में लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज कराई हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बस्ती के लोग अब आंदोलन की राह अपनाने की चेतावनी दे रहे हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है बल्कि किसी बड़े हादसे की आशंका को भी जन्म दे रही है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो यह लापरवाही कभी भी एक बड़े हादसे में बदल सकती है जिसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।