तेज रफ्तार का कहर, बीआरएल डीएवी स्कूल की बस राजाबेडा में दुर्घटनाग्रस्त
हाइवा से स्कूल बस की टक्कर, घटना के समय बस मे सवार थे लगभग 30 बच्चे।

दर्जनों बच्चे चोटिल, एक बच्चे की हालत गंभीर, भेजा गया बीजीएच।
बेरमो /बृहस्पतिवार को सुबह एक बड़ा सड़क हादसा सामने आया है।जिसे तेज रफ्तारी का कहर ही कहा जा सकता है। मिली जानकारी के अनुसार बीआरएल डीएवी स्कूल (BRL DAV School), भंडारीदह की स्कूली बस राजाबेडा के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। बताया जाता है कि एक ओर से स्कूल बस तेज गति से जा रही थी वही दुसरी दिशा से एक ट्रक तेज रफ्तार से आ रही थी और देखते ही देखते दोनो की आमने-सामने टक्कर हो गई। जिसके बाद बच्चों से भरी बस में अफरा-तफरी मच गई। घटना के समय उक्त बस में लगभग 30 बच्चों के सवार होने की बाते सामने आ रही है। इस घटना मे दर्जनों बच्चे मामूली रुप से घायल हुए तो कुछ बच्चों को गहरी चोटें भी आई जबकि एक बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है जिन्हें बेहतर इलाज के लिए बोकारो बीजीएच भेज दिया गया है। जबकि बाकि बच्चों का इलाज डीवीसी चन्द्रपुरा अस्पताल में चल रहा है। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से राहत कार्य शुरू किया गया और सभी बच्चों को आनन फानन चन्द्रपुरा अस्पताल पहुंचाया गया। घायल बच्चों के अस्पताल पहुचते ही तत्काल इलाज शुरु किया गया। प्रशासन और स्कूल प्रबंधन भी मौके पर पहुँच चुके हैं। घटना की सूचना पाते ही बेरमो एसडीएम मुकेश मछुवा अस्पताल पहुचे और घायल बच्चों को बेहतर चिकित्सीय सुविधा मुहैया करने का निर्देश दिया तथा इस घटना की जानकारी तत्काल बोकारो उपायुक्त अजय नाथ झा को दी गई। मिडिया से घटना के संबंध में जानकारी देते हुए एसडीओ श्री मछुवा ने बताया कि कुछ बच्चे घायल हुए हैं जिसमें एक बच्चे को बीजीएच भेजा गया है जहां उपायुक्त महोदय के निर्देश पर बेहतर इलाज सुनिश्चित की गई है। जबकि घायल बच्चे के बात करने से पता चली की स्कूल बस की रफ्तार काफी थी और ट्रक की भी रफ्तार ज्यादा थी जिस कारण दोनो वाहन अनियंत्रित अवस्था में एक दुसरे से टकरा गई। सौभाग्य से सभी बच्चों की हालत खतरे से बाहर बताया गया है। ऐसे वाहनों और उनके चालकों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है जो दर्जनों बच्चों के जीवन को खेल समझते हैं और बच्चों के भरे बस को अनियंत्रित रफ्तार में चलाते हैं। वहीं घटना के बाद अस्पताल में अभिभावकों की भारी भीड़ इक्कठा हो गई थी जबकि स्कूल प्रबंधन लगातार अस्पताल में बने थे।