आदित्यपुर नगर निगम वार्ड 17 में अनुभव, संगठन और विश्वसनीयता बनाम घोषणापत्र आधारित राजनीति
वार्ड 17 में चुनावी हलचल तेज, मोतियों का हार चिन्ह के साथ नीतू शर्मा का डोर-टू-डोर अभियान

आदित्यपुर : नगर निगम क्षेत्र के वार्ड 17 में चुनावी मुकाबला धीरे-धीरे स्पष्ट रूप लेता दिखाई दे रहा है। इस वार्ड में चुनाव केवल प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि अलग-अलग राजनीतिक कार्यशैलियों और प्राथमिकताओं के बीच होता नजर आ रहा है। पूर्व पार्षद नीतू शर्मा जिन्हें वैलेट पेपर पर क्रम संख्या चार में मोतियों का हार चुनाव चिन्ह मिला है अपने पूर्व कार्यकाल के अनुभव के साथ मैदान में हैं। उनका चुनावी दृष्टिकोण अपेक्षाकृत कम आक्रामक और अधिक संवाद-आधारित दिख रहा है। शुरुआती दिनों में उन्होंने चुनाव प्रचार की बजाय लोगों की समस्याएँ सुनने की बात कही जो बाद में समर्थकों के आग्रह पर डोर-टू-डोर अभियान में बदली। यह रणनीति संकेत देती है कि वे अपने कार्यकाल की उपलब्धियों और व्यक्तिगत संपर्क को अपनी प्रमुख ताकत मान रही हैं। महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पिछले आठ वर्षों में उनके कार्यकाल को लेकर क्षेत्र में विकास कार्यों की चर्चा होती रही है और अब तक उनके विरुद्ध किसी भ्रष्टाचार संबंधी आरोप का सामने न आना उनकी छवि को मजबूती देता है। तेजस्विनी महिला संगठन की सक्रियता यह भी दर्शाती है कि महिला मतदाताओं के बीच सामाजिक जुड़ाव एक निर्णायक कारक बन सकता है। वहीं दूसरी ओर वार्ड में अन्य दलों के उम्मीदवार अलग-अलग रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। राजद समर्थित उम्मीदवार को लेकर शराब व्यवसाय से जुड़ी चर्चाएँ सामाजिक विमर्श का हिस्सा बनी हुई हैं जिससे महिला मतदाताओं के दृष्टिकोण पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं कांग्रेस समर्थित पूर्व पार्षद और भाजपा समर्थित पूर्व डिप्टी मेयर द्वारा संकल्प पत्र जारी करना विकास आधारित वादों को केंद्र में लाने का प्रयास माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल संकल्प पत्र या आरोप-प्रत्यारोप ही नहीं, बल्कि पिछले कार्यों का रिकॉर्ड, स्थानीय उपस्थिति और जनता से सीधा संवाद इस वार्ड में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। वार्ड 17 का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ मतदाता भावनात्मक नारों से अधिक व्यावहारिक अनुभव और विश्वसनीयता को तौलते हुए निर्णय लेने के संकेत दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अनुभव आधारित राजनीति भारी पड़ती है या वादों और नए दावों की रणनीति मतदाताओं को अधिक प्रभावित करती है।