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संघर्षों से ही खत्म होगा शोषण, आदिवासियों की एकता ही उनकी ताकत : मुख्यमंत्री

रिपोर्ट: VBN News Desk5 घंटे पहलेझारखण्ड

नेमरा में शिबू सोरेन की प्रतिमा का अनावरण, पहली पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

संघर्षों से ही खत्म होगा शोषण, आदिवासियों की एकता ही उनकी ताकत : मुख्यमंत्री

रामगढ़: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को नेमरा गांव में अपने पिता एवं झारखंड आंदोलन के पुरोधा शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर नेमरा गांव से सटे लुकैयाटांड़ स्थित सोना सोबरन हाई स्कूल परिसर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा का अनावरण किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जंगलों में रहने वाले आदिवासियों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। शोषण के खिलाफ संघर्ष और आंदोलन ही अधिकारों की लड़ाई का रास्ता है और यही संदेश दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने पूरे समाज को दिया था। उन्होंने कहा कि उनके विचार आज भी समाज को मार्गदर्शन दे रहे हैं।

हेमंत सोरेन ने कहा कि यह दिन उनके परिवार के साथ-साथ राज्य के दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के लिए भी अत्यंत भावुक और पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि स्कूल परिसर में प्रतिमा स्थापित करने का उद्देश्य नई पीढ़ी को संघर्ष, बलिदान और झारखंड आंदोलन के इतिहास से जोड़ना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली अतीत को जानें और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित हों।

मुख्यमंत्री ने अपने दादा सोबरन मांझी को भी याद करते हुए कहा कि लुकैयाटांड़ के जंगल में उनका समाधि स्थल है, जहां उनकी हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि शोषण करने वालों के चेहरे समय के साथ बदल गए हैं, लेकिन उनकी मानसिकता आज भी वैसी ही बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के सामने अवसर भी हैं और चुनौतियां भी। इसलिए युवाओं को सही दिशा देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। गुरुजी के आदर्श आज पूरे झारखंड को एकजुट होकर आगे बढ़ने का संदेश दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड राज्य के निर्माण के जिस सपने को शिबू सोरेन ने साकार किया, उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उनकी सरकार निभा रही है। सरकार का प्रयास है कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और जनता की आवाज़ आसानी से सरकार तक पहुंचे, इसके लिए प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती वीरों और संघर्षशील लोगों की भूमि रही है। पूर्वजों ने आजादी और अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी थी। आज जरूरत इस बात की है कि समाज अपनी एकता बनाए रखे और उसे तोड़ने वाली ताकतों को सफल न होने दे।

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