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50% अभिभावकों की अनुपस्थिति से कुकड़ू आवासीय बालिका विद्यालय की प्रबंध समिति का गठन टला, जिला परिषद उपाध्यक्ष ने तलब की रिपोर्ट

रिपोर्ट: MANISH 14 घंटे पहलेझारखण्ड

बिना समुचित सूचना बैठक कराना नियमों के विरुद्ध - मधुश्री महतो ने कहा, दोषियों की जिम्मेदारी तय हो और दोबारा पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए

50% अभिभावकों की अनुपस्थिति से कुकड़ू आवासीय बालिका विद्यालय की प्रबंध समिति का गठन टला, जिला परिषद उपाध्यक्ष ने तलब की रिपोर्ट

सरायकेला : कुकड़ू प्रखंड स्थित झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय में नई गाइडलाइन के तहत विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) के गठन की प्रक्रिया अधूरी रह गई। 20 जुलाई को आयोजित बैठक में आवश्यक 50 प्रतिशत अभिभावकों की उपस्थिति नहीं होने के कारण समिति का गठन स्थगित कर दिया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला परिषद सरायकेला-खरसावां की उपाध्यक्ष एवं स्वास्थ्य, शिक्षा तथा महिला, शिशु एवं सामाजिक कल्याण स्थायी समिति की अध्यक्ष मधुश्री महतो ने प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ), कुकड़ू को पत्र भेजकर पूरे मामले का प्रतिवेदन मांगा है। अपने पत्र में मधुश्री महतो ने कहा है कि विभागीय निर्देशों एवं बीईईओ के पत्रांक-254 (दिनांक 18 जुलाई 2026) के आलोक में बीआरपी एवं सीआरपी पर्यवेक्षकों द्वारा विद्यालय प्रबंध समिति के गठन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन नई गाइडलाइन के अनुरूप सभी अभिभावकों को फोन, समूह संदेश अथवा अन्य माध्यमों से समुचित सूचना नहीं दी गई। इसके कारण बैठक में अपेक्षित संख्या में अभिभावक नहीं पहुंचे और कोरम पूरा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि विद्यालय प्रबंध समिति का गठन पूरी तरह पारदर्शी एवं नियमसम्मत होना चाहिए। यदि सभी अभिभावकों को समय पर सूचना नहीं दी गई तो इसकी जांच होनी चाहिए और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई नहीं जानी चाहिए। जिला परिषद उपाध्यक्ष ने प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी से 20 जुलाई की बैठक में प्रतिनियुक्त पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट, अभिभावकों की उपस्थिति पंजी तथा बैठक की कार्यवाही की प्रमाणित प्रति शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगली बैठक की तिथि तय कर सभी अभिभावकों को नियमानुसार लिखित सूचना एवं अन्य माध्यमों से समय रहते जानकारी दी जाए ताकि पर्याप्त उपस्थिति सुनिश्चित हो सके और विद्यालय प्रबंध समिति का गठन विधिवत एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत संपन्न कराया जा सके। इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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