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सरकारी स्कूल का कारनामा! बच्चों के सेहत के साथ किया जा रहा खिलवाड़

रिपोर्ट: VBN News Desk1 घंटे पहलेझारखण्ड

मिड डे मील में परोसा जा रहा बासी खाना, बच्चे करने लगे उल्टियां “बच्चे को पढ़ने भेजते हैं, मरने के लिए नहीं”: ग्रामीण

सरकारी स्कूल का कारनामा! बच्चों के सेहत के साथ किया जा रहा खिलवाड़

फूड प्वाइजनिंग से दर्जनों बच्चे बीमार, खतरे से बाहर,

आक्रोशित ग्रामीणों ने स्कूल में जड़ा ताला, विभाग से कार्रवाई की मांग

हंटरगंज(चतरा): सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेवारी वहां के शिक्षकों की होती है। परंतु चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय सेलवार स्कूल के शिक्षकों की लापरवाही के कारण स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ गई। ग्रामीणों और छात्रों का आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन के द्वारा बुधवार को बच्चों को मध्यान भोजन में बासी भोजन गर्म करके खिलाया गया। इससे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे फूड प्वाइजनिंग के चपेट में आ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चे जैसे ही मिड डे मिल खाकर घर आए, उल्टी करने लगे। जब अभिभावकों ने छात्रों से पूछा तो उन्होंने डरते हुए बताया कि बासी चावल खाने से उल्टी हुई है,हालांकि बच्चों की स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर है। इधर आक्रोशित ग्रामीणों ने गुरुवार सुबह स्कूल में ताला जड़ दिया। और हंगामा करने लगे,अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में बच्चों को बासी खाना दिया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने मेनू के अनुसार खाने नहीं देने का भी आरोप लगाया है। जिसके बाद मुखिया प्रतिनिधि रामबाबू मौके पर पहुंचे और मामला शांत करवाया।

मंगलवार को स्कूल में मध्याह्न भोजन बनाया जा रहा था, इसी दौरान भोजन आधा ही पक्का था कि अचानक गैस खत्म हो गई। जिसके बाद रसोईया और शिक्षकों के द्वारा उसे रसोई रूम में प्लास्टिक पर बिखेर दिया गया। नित्य - प्रतिदिन के तरह जब बुधवार को बच्चे स्कूल पहुंचे तो अवशेष बचा मध्यान भोजन को गर्म करके बच्चों के थाली में परोस दी गई। ऐसे में चावल खाने के बाद जैसे ही बच्चे घर पहुंचे कुछ बच्चों की स्थिति बिगड़ गई। बच्चे उल्टी और दस्त करने लगे। बच्चों के अभिभावकों ने ग्रामीण चिकित्सकों से इलाज कराया इस दौरान ग्रामीणों में अफरा तफरी मच गई। हालांकि सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं।

बच्चे को पढ़ने भेजते हैं, मरने के लिए नहीं: ग्रामीण

सुबह होते ही बासी खाने की शिकायत करने आक्रोशित ग्रामीण स्कूल पहुंचे अभिभावकों ने कहा कि स्कूल में बासी खाना खिलाने की खबर मिलते ही वे लोग स्कूल पहुंचे। और जमकर हंगामा करते हुए स्कूल में ताला जड़ दिया। ग्रामीणों ने बताया कि बच्चे रोज़ घर जाकर शिकायत करते हैं कि साप्ताहिक तौर पर मिलने वाला भोजन भी बच्चों को नहीं दिया जा रहा है। “रोज़ बच्चे को खिचड़ी खिलाते हैं, खिचड़ी खिलाके क्या मारना है? स्कूल में पढ़ाने भेजते हैं, मरने के लिए तो नहीं भेजते हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग से उचित जांच कर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि इस मामले में पूछे जाने पर स्कूल प्राचार्या मीरा देवी ने कुछ भी कहने से इंकार किया। इस दौरान जानकारी मिलते ही मुखिया प्रतिनिधि राम बाबू मौके पर पहुंचे और जायजा लिया, हालांकि उन्होंने ग्रामीणों को समझा- बुझाकर मामला को शांत करवाया और ताला खुलवाया, जिसके बाद स्कूल सुचारू ढंग से प्रारंभ हुई। इधर प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी किशोर कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी। बच्चों के सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले लोगों को बक्सा नहीं जाएगा।

करोड़ों का बजट खर्च करती है झारखंड सरकार

बता दें कि झारखंड सरकार राज्य के सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करने और बच्चों को उच्च गुणवत्ता के पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने को लेकर करोड़ों रुपए के भारी-भरकम बजट खर्च करती है।यह करोड़ों की राशि हर महीने खर्च की जाती है. बावजूद इसके विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों की मनमानी के कारण बच्चों को उच्च गुणवत्ता युक्त भोजन के बजाय बासी चावल खाना पड़ा जिस कारण बच्चों की जान आफत में पड़ गई।

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