धान अधिप्राप्ति में भारी लापरवाही, प्रखंड आपूर्ति व सहकारिता पदाधिकारियों पर उपायुक्त का कड़ा प्रहार
शिथिल कार्यप्रणाली से किसान परेशान, दोषी पदाधिकारियों को शोकॉज और वेतन रोकने की चेतावनी

सरायकेला-खरसावाँ : जिले में धान अधिप्राप्ति कार्य में सामने आ रही गंभीर लापरवाहियों को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त नितीश कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और प्रखंड सहकारिता पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की गई। बैठक में स्पष्ट हुआ कि कई प्रखंडों में धान अधिप्राप्ति की प्रगति बेहद धीमी है, जिसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। जिला आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि जिले में 6,336 पंजीकृत किसानों के विरुद्ध अब तक मात्र 801 किसानों से 45,235.81 क्विंटल धान की खरीद हो सकी है। यह आंकड़ा प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है। सबसे गंभीर स्थिति किसानों के भुगतान को लेकर सामने आई जहां कई मामलों में 48 घंटे में भुगतान की सरकारी व्यवस्था का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धान अधिप्राप्ति जैसी किसान हितैषी योजना में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन लैम्प्स में कार्य प्रगति असंतोषजनक पाई गई है वहां के संबंधित प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी एवं प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी को शोकॉज जारी किया गया है। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के वेतन निकासी पर रोक लगाने जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में यह भी सामने आया कि कई प्रखंडों में किसान पंजीकरण, धान उठाव और एडवांस सीएमआर जनरेशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में घोर उदासीनता बरती जा रही है। उपायुक्त ने इसे प्रशासनिक गैर-जिम्मेदारी करार देते हुए सभी प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को स्पष्ट जवाबदेही के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने दो टूक कहा कि धान अधिप्राप्ति में किसानों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी अधिकारी की लापरवाही से यदि किसान परेशान हुए तो जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई तय है। उन्होंने पारदर्शिता, नियमित मॉनिटरिंग और समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष जोर देते हुए यह संदेश दिया कि अब ढिलाई नहीं जवाबदेही तय होगी।