बरवाडीह-छिपादोहर क्षेत्र में अवैध ईंट भट्ठों का धंधा तेज, नियमों की अनदेखी से पर्यावरण और राजस्व को नुकसान
बिना लाइसेंस चल रहे दर्जनों चिमनी व बंगला भट्ठे, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

बरवाडीह, लातेहार : बरवाडीह और छिपादोहर क्षेत्र में इन दिनों अवैध ईंट भट्ठों के संचालन का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुर्गीडीह, घोड़ाकरम, लुहुर और पैरा सहित कई गांवों में पिछले करीब तीन महीनों से बिना वैध लाइसेंस और अनुमति के कई चिमनी तथा बंगला ईंट भट्ठे खुलेआम संचालित किए जा रहे हैं। इन भट्ठों में अवैध रूप से मिट्टी का उत्खनन कर बड़े पैमाने पर ईंटों का निर्माण किया जा रहा है और बिना चालान व रसीद के बाजार में बिक्री की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार ट्रैक्टरों के माध्यम से दिनदहाड़े ईंटों की ढुलाई और बिक्री की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र में संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद होने के बावजूद अब तक इन अवैध भट्ठों पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि पलामू टाइगर रिजर्व के आसपास के क्षेत्रों में भी दर्जनों भट्ठे अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। इन भट्ठों में लकड़ी और कोयले का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है जिससे जंगलों पर दबाव बढ़ रहा है। कई ग्रामीणों का कहना है कि भट्ठों के लिए जंगलों से अवैध रूप से लकड़ी काटी जा रही है जिससे वन संपदा को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। ईंट भट्ठों से निकलने वाला धुआं आसपास के गांवों में प्रदूषण बढ़ा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि घने धुएं और राख के कारण सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है और खेती-बाड़ी तथा पेड़-पौधों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। जानकारों के अनुसार ईंट भट्ठा संचालन के लिए खनन विभाग, प्रशासन और झारखंड स्टेट पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य है। नियमों के तहत पर्यावरण स्वीकृति, भूमि उपयोग की अनुमति और प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन जरूरी होता है। इसके बावजूद क्षेत्र में कई भट्ठे बिना किसी कागजात और नियमों के ही संचालित हो रहे हैं जिससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध ईंट भट्ठों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।