महंगी मूर्तियों के दौर में मिसाल बने चैनपुर के मूर्तिकार मृत्युंजय प्रजापति उर्फ संगम पेंटर: महज 8,500 रुपए में तैयार की मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा
श्रीनगर पूजा समिति के लिए बनाई आकर्षक प्रतिमा; बाहरी मूर्तिकारों के भारी-भरकम चार्ज से राहत देकर ग्रामीण संस्कृति को बढ़ा रहे हैं आगे, समिति ने जताया आभार

चैनपुर-: आज के दौर में जहां व्यावसायिकता हावी है और बाहर से आने वाले मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने के लिए 35 हजार, 50 हजार से लेकर लाखों रुपए तक चार्ज करते हैं, ऐसे में गुमला जिले के चैनपुर के एक स्थानीय कलाकार ने अनूठी मिसाल पेश की है। चैनपुर के जाने-माने मूर्तिकार मृत्युंजय प्रजापति (उर्फ संगम पेंटर) ने श्रीनगर पूजा समिति के लिए बेहद कम कीमत पर मां दुर्गा की भव्य और आकर्षक प्रतिमा तैयार की है।
महज 8,500 रुपए में तैयार की प्रतिमा मूर्तिकार मृत्युंजय प्रजापति ने बताया कि उन्होंने श्रीनगर पूजा समिति के आग्रह पर मात्र 8,500 रुपए के मामूली शुल्क पर यह पूरी प्रतिमा तैयार की है। उनका उद्देश्य सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पूजा-पाठ और आयोजनों को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि बाहरी मूर्तिकारों के अत्यधिक पैसे चार्ज करने की वजह से ग्रामीण इलाकों और छोटे कमेटियों के लोगों को मूर्ति का बजट जुटाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों की आस्था को दे रहे हैं मजबूती मृत्युंजय प्रजापति सरस्वती पूजा, दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक उत्सवों के दौरान हमेशा से कम लागत में कलाकृतियां बनाकर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की मदद करने का भाव रखते हैं। उनकी इस कला और जनहितैषी सोच की वजह से आज ग्रामीण इलाकों में भी बिना किसी आर्थिक दबाव के भव्य तरीके से पर्व मनाना संभव हो पा रहा है।
श्रीनगर पूजा समिति ने जताया आभार कम खर्च में इतनी सुंदर और मनमोहक प्रतिमा मिलने से श्रीनगर पूजा समिति के सदस्यों और ग्रामीणों में भारी उत्साह है। समिति के अध्यक्ष अवधेश प्रताप सहदेव ने मूर्तिकार मृत्युंजय प्रजापति (संगम पेंटर) की कला और उनके इस सराहनीय सोच की दिल से सराहना की है। अध्यक्ष अवधेश प्रताप सहदेव ने कहा कि आज के इस मंहगाई के दौर में जहां कला और कलाकारों का मोल सिर्फ पैसों से आंका जाता है, वहीं मृत्युंजय प्रजापति ने ग्रामीण संस्कृति और धार्मिक आयोजनों को जीवित रखने के लिए जो समाज सेवा का परिचय दिया है, वह वाकई अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि ऐसे समर्पित कलाकार ही हमारे समाज और संस्कृति की असली ताकत हैं, जो बिना किसी लालच के ग्रामीण क्षेत्रों में खुशियां और भक्ति का माहौल तैयार करते हैं। समिति ने मूर्तिकार के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनके प्रति अपना गहरा आभार व्यक्त किया है।