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पलामू टाईगर प्रोजेक्ट क्षेत्र से वन्य जीव की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय व अंतराष्ट्रीय गिरोह का किया गया पर्दाफाश : प्रजेश जेना

रिपोर्ट: Shailendra Tiwary7 घंटे पहलेझारखण्ड

नेपाल व बांग्लादेश के बॉर्डर क्षेत्र से साउथ एशिया व चीन में भी वन्य जीव की हुई है तस्करी

पलामू टाईगर प्रोजेक्ट क्षेत्र से वन्य जीव की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय व अंतराष्ट्रीय गिरोह का किया गया पर्दाफाश : प्रजेश जेना

पलामू टाईगर प्रोजेक्ट के उप निदेशक ने 61 अपराधियों को किया गिरफ्तार वन्य जीव की तस्करी में कथित कई सफेदपोश भी हैं शामिल

मेदिनीनगर (पलामू) : पलामू टाइगर प्रोजेक्ट क्षेत्र से वन्य जीव की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। इसमें 61 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। उक्त जानकारी पलामू टाइगर प्रोजेक्ट क्षेत्र के उप निदेशक प्रजेश जेना ने दी।

उन्होंने गुरुवार को अपने वेश्म में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि अंतरराष्ट्रीय गिरोह से संबंध रखने वाले कई अंतरराज्यीय गिरोह के लोग पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र के आदिवासी परिवारों से वन्य जीव की तस्करी कराते हैं। उन्होंने बताया कि केस स्टडी में पता चला कि इसमें राजस्थान के तबेला परिवारों के लोग वन्य जीव को पकड़ने के लिए फांस बनाते हैं। वे प्रोजेक्ट क्षेत्र के आदिवासी लोगों को इसकी ट्रेनिंग देते हैं।

वन्य जीव को पकड़ने के बाद उसे मार दिया जाता है। साथ ही कई जीवित वन्य जीव आदिवासी परिवार से काफी कम पैसे में खरीदकर तस्करी के लिए नेपाल व बांग्लादेश के बॉर्डर क्षेत्र के माध्यम से मध्य एशिया सहित चीन में बड़ी कीमत लेकर बिक्री की जाती है। इसमें कई बताया जाता है कि विदेश में संबंधित वन्य जीव का प्रयोग ट्रेडिशनल तरीके से दवा बनाने के काम में लाया जाता है।

उन्होंने बताया कि गिरोह को पकड़ने के लिए वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो व पलामू टाइगर रिजर्व की गठित संयुक्त टीम के साथ डीएफओ मेदिनीनगर, डीएफओ लातेहार, डीएफओ गढ़वा नॉर्थ, डीएफओ जमशेदपुर, डीएफओ रांची, डीएफओ गुमला, डीएफओ पालकोट, छत्तीसगढ़ राज्य के एसडीओ कुसमी, डीएफओ जसपुर, डीएफओ बलरामपुर, डीडीयूएस टाइगर रिजर्व व बिहार राज्य के डीएफओ दरभंगा व डीएफओ बंका के संयुक्त अभियान छत्तीसगढ़, बिहार व झारखंड में चलाया गया। उन्होंने बताया कि अभियान में 61 अभियुक्तों को पकड़ा गया है। उन्होंने बताया कि झारखंड बिहार व छत्तीसगढ़ से पकड़े गए तस्करों के पास से पैंगोलिन वन्य जीव का शल्क 60 किलोग्राम पकड़ा गया। ‌ झारखंड के रांची व बिहार के बक्सर से 2 दोमुंहा सांप बरामद किया गया। झारखंड के जमशेदपुर से 2 किलोग्राम कोरल, बिहार के दरभंगा से 2 हिरण का स्कीन व एक लेपर्ड का स्कीन बरामद किया गया है। उन्होंने बताया कि पलामू के हरिहरगंज से सांप का दो बोतल जहर, पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र से तीन भरठुआ देसी बंदूक, एक पीस मोर का पैर, संभावित बाघ के हड्डी का पाउडर, फोर व्हीलर स्कॉर्पियो, एक मोटरसाइकिल व एक गुलेल बरामद किया गया है। उन्होंने बताया कि शिकारी गारु का राजू उरांव व गुमला पालकोट का बहुरन सिंह अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़कर वन्य जीव की तस्करी करते हैं। राजू उरांव गरीब आदिवासियों से वन्य जीव के बदले काफी कम राशि देकर खरीद करता है। वह बिहार के औरंगाबाद निवासी मोहम्मद सिराज को सप्लाई करता है।

मेदिनीनगर का गोपाल सिंह व सिराज मिलकर वन्य जीव की बाहर सप्लाई करते हैं। रांची का मसूद आलम का तार दिल्ली के हापुड़ गिरोह से जुड़ा हुआ है। ये दोमुहां सांप स्मगलिंग करता है। चंदवा का मोहम्मद जमशेद का लिंक नेपाल से जुड़ा हुआ है। उपनिदेशक ने बताया कि राजू उरांव नक्सली था व जेल भी गया था। यह बंदूक के साथ शिकार करता है। ये पैंगोल शल्क के खरीद बिक्री का सरगना है। स्वयं को छुड़वाने के लिए कुछ ही क्षण में सैकड़ों की भीड़ जमा करने में महारत हासिल रखता था। औरंगाबाद का मोहम्मद सिराज नाग का जहर का कारोबारी है। बिहार के बक्सर का रहने वाला जयराम सिंह दोमुहां सांप को पलता है और इसे बेचता है। बक्सर का इंद्रजीत कुशवाहा जयराम सिंह का पार्टनर है। दोनों मिलकर सांप पालने का काम करते हैं। बिहार के मधुबनी का रहने वाला अजय कुमार झा, मुजफ्फरपुर का धीरज कुमार श्रीवास्तव व मधुबनी का पंकज कुमार झा ये सभी सफेदपोश बताए जाते हैं। इन सभी की वन्य जीव तस्करी में पूर्ण संलिप्तता है। उन्होंने बताया कि यह सभी अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़कर वन्य जीव की तस्करी करते हैं।

इन सभी पर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया गया है कहा कि अभियान फिलहाल जारी है। अपराधियों को पकड़ने का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि जेल भेजे गए तस्कर छूट नहीं, इसके लिए व्यापक तरीके से काम किया जा रहा है। थोड़े पैसे के लालच में वन्य जीव की हत्या करने वाले जंगल क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी परिवारों को जागरूक किया जाएगा। उन्हें रोजगार से जोड़ने का कार्यक्रम है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेंजर उमेश दुबे मौजूद थे।

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