राम कथा के श्रवण से मोक्ष की होती है प्राप्ति: आचार्य रविशंकर जी महाराज
रामकथा में कथावाचक द्वारा मनमोहक भजन की प्रस्तुति की गई।

हिरणपुर । धन व पद का अहंकार किसी को नही करना चाहिए। इसके लिए एक बार श्मशान घाट में जाकर देखना अनिवार्य है। बुधवार शाम बजरंगबली पूजा समिति द्वारा हिरणपुर में आयोजित रामकथा में कथावाचक आचार्य रविशंकर जी महाराज ने कहा। आचार्य ने कहा मनुष्य को कभी भी अहंकार नही करना चाहिए।
सभी को एक दिन तो खाली हाथ जाना है। सत्संग कथावाचक व श्रोताओ का राग का मिलन है। कथा भी एक संवाद है। संत का क्षण व अन्न का कण व्यर्थ नही जाना चाहिए। कथा का मूल उद्देश्य है संत समागम। उन्होंने कहा कि वेद व्यास पीठ पर महिलाओं को बैठकर प्रवचन नही करना चाहिए। जो अनुशासनहीनता व मर्यादा के विपरीत है। वेद ब्रम्हा है।
श्रीराम निराकार है। आचार्य ने कहा कि सहजता व सरलता पर हर व्यक्ति को विचार करना चाहिए। पर इसे व्यवहार में नही लाना चाहिए। हमे हमेशा से बड़ो का सम्मान व छोटे का आदर करना चाहिए। 14 वर्ष वनवास के बाद जब श्रीराम अपने घर वापस लौटे तो पाया कि मां कैकेई लज्ज़ा से एक ओर खड़ी थी। जो अपराध बोध से ग्रस्त थी। क्योंकि वनवास भी उन्ही के कहने में भेजा गया था । पर भगवान राम ने सबसे पहले कैकेई से ही मिलकर आशीर्वाद लिया। जो भी जितना भी क्रूर व पापी हो।
राम के शरण मे आने पर धन्य हो जाता है। पार्वती ने भगवान शिव से एक बार पूछा कि राम कौन है। इसको लेकर शिव ने कहा कि राम ही सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि सन्तानो को आप धन नही संस्कार दे। जब वृद्ध मां पिता को सन्तान अलग छोड़ देता है तो काफी पीड़ा होती है , पर मां पुत्र को श्राप नही देती। मां के आंखों से निकले व्यथा की आंसू से पुत्र कभी सहज रूप से रह नही सकता। इसलिए माता पिता का सेवा करना आवश्यक है। माता पिता ही भगवान का दुरा रूप है। धरती पर जब जब अत्याचार बढ़ा है , अवतार का प्रादुर्भाव हुआ है। इसलिए कर्म में ब्रम्हत्व ग्रहण करे।
जीवन मे कभी भी संवाद हीनता नही करना चाहिए। संवाद से ही परिवार एकत्रित रहता है। रामकथा के श्रवण से मोक्ष की प्राप्ति होती है। कैलाश पर्वत में भगवान शिव ने राम कथा का वर्णन किया था। जो आज आपके नगर में किया जा रहा है। भगवान राम पर तर्क करना व्यर्थ है। क्योकि भगवान राम हर कण में है। रामकथा में कथावाचक द्वारा मनमोहक भजन की प्रस्तुति की गई। इस कार्यक्रम में आयोजित कमिटी के तपन ठाकुर , लक्ष्मी देवी , चन्दन दत्ता , मानस बनर्जी , जितेन लाहा, शालिनी, अजय भगत आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।