शिव शिष्य परिवार के राष्ट्रीय सम्मेलन में बड़ा फेरबदल, अनिल साहू बने राष्ट्रीय संरक्षक व रंजीत जायसवाल बने प्रमंडलीय संरक्षक
राष्ट्रीय प्रमुख भाई धनंजय की घोषणा - बबलू गुप्ता, लाला प्रसाद यादव समेत कई पदों पर नियुक्ति, मेदिनीनगर में आश्रम निर्माण का ऐलान

मेदिनीनगर, पलामू : झारखंड के मेदिनीनगर में आयोजित शिव शिष्य परिवार इकाई के राष्ट्रीय सम्मेलन में संगठनात्मक विस्तार और सशक्तिकरण की दिशा में कई अहम फैसले लिए गए। स्थानीय रामाडा होटल में आयोजित इस भव्य सम्मेलन में राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रदेश और प्रमंडल स्तर तक पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई जिसमें संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने नई जिम्मेदारियों की घोषणा करते हुए संगठन को नई दिशा देने का संदेश दिया। सम्मेलन में मुख्य भूमिका निभाते हुए शिव शिष्य परिवार इकाई के राष्ट्रीय प्रमुख भाई धनंजय ने संगठन के पुनर्गठन की घोषणा की। उन्होंने अनिल साहू को राष्ट्रीय संरक्षक के रूप में नियुक्त किया जिसे उपस्थित शिव शिष्यों ने जोरदार समर्थन और जयकारों के साथ सर्वसम्मति से पारित किया। इसी क्रम में संगठन के राष्ट्रीय स्तर पर अन्य महत्वपूर्ण पदों की भी घोषणा की गई। बबलू गुप्ता को राष्ट्रीय महासचिव जबकि आशीष अग्रवाल को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। वहीं प्रदेश और क्षेत्रीय स्तर पर भी जिम्मेदारियों का बंटवारा करते हुए लाला प्रसाद यादव को झारखंड प्रदेश संरक्षक, रंजीत जायसवाल को पलामू प्रमंडलीय संरक्षक और राकेश को पलामू जिला संरक्षक बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया जिसे सभी ने एक स्वर में स्वीकार किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राकेश सिंह ने की जबकि संचालन कमलदेव द्वारा किया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय प्रमुख भाई धनंजय उपस्थित रहे वहीं वाराणसी से आईं विशिष्ट अतिथि सुनीता की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। नव-नियुक्त राष्ट्रीय संरक्षक अनिल साहू ने अपने संबोधन में कहा कि संगठन ने उन्हें जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है उसे वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वे गुरु-भाइयों और बहनों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे और संगठन के विस्तार के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे। राष्ट्रीय महासचिव बबलू गुप्ता ने अपने वक्तव्य में संगठन की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब तक शिव शिष्यों के लिए शहर में कोई स्थायी आश्रम नहीं था लेकिन अब सभी के सहयोग और समर्पण से यह सपना साकार होने जा रहा है। झारखंड प्रदेश संरक्षक लाला प्रसाद यादव ने अपने दायित्व को स्वीकार करते हुए कहा कि वे संगठन के लिए पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने इसे सौभाग्य बताते हुए कहा कि इतने बड़े आध्यात्मिक संगठन से जुड़ना उनके लिए गर्व की बात है। पलामू प्रमंडलीय संरक्षक रंजीत जायसवाल ने भी संगठन के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वे मन, कर्म, धन और वचन से संगठन के साथ खड़े रहेंगे और इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाएंगे।
आश्रम निर्माण का बड़ा निर्णय
सम्मेलन के दौरान सबसे महत्वपूर्ण निर्णय मेदिनीनगर में शिव शिष्य परिवार इकाई का आश्रम निर्माण करने का लिया गया। राष्ट्रीय प्रमुख भाई धनंजय ने इस अवसर पर हाउसिंग कॉलोनी में स्थित अपनी निजी भूमि आश्रम निर्माण के लिए दान देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आगामी महाशिवरात्रि तक आश्रम निर्माण का कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। यह आश्रम न केवल शिव शिष्यों के लिए एक आध्यात्मिक केंद्र होगा बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने और साधना का भी प्रमुख स्थान बनेगा। इस दौरान पलामू संयोजक राकेश सिंह ने आश्रम की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले शिव शिष्यों को रात्रि विश्राम के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आश्रम बनने से इन समस्याओं का स्थायी समाधान होगा और आध्यात्मिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सम्मेलन में उपस्थित शिव शिष्यों ने आश्रम निर्माण को लेकर एकजुटता दिखाई और आर्थिक सहयोग प्रदान करते हुए इसे शीघ्र पूरा करने का संकल्प लिया।
संगठन का आध्यात्मिक संदेश
अपने संबोधन में राष्ट्रीय प्रमुख भाई धनंजय ने कहा कि शिव शिष्य परिवार कोई पंथ नहीं, बल्कि गुरु भगवान शिव के सानिध्य में समर्पित होने का मार्ग है। उन्होंने कहा कि शिव का वास हर जीव में है और अध्यात्म स्वयं को पहचानने की प्रक्रिया है। उन्होंने सभी शिव शिष्यों से आह्वान किया कि वे आत्म-जागृति के मार्ग पर चलकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं और संगठन को मजबूत करें। सम्मेलन में भाई अजीत, भाई सिकंदर, बहन कमला, भाई संजय केसरी, भाई टेलु, बहन किरण, कामेश, बचु, बहन शारदा, नरेश, भाई सत्यम सहित बड़ी संख्या में शिव शिष्यगण उपस्थित रहे। मेदिनीनगर में आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन न केवल संगठनात्मक विस्तार का प्रतीक बना बल्कि आध्यात्मिक जागरण और सामाजिक एकता का भी संदेश लेकर आया। नई नियुक्तियों और आश्रम निर्माण के फैसले के साथ शिव शिष्य परिवार इकाई ने भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार कर लिया है।