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जिला परिषद लातेहार में खुलेआम टेंडर मैनेजिंग, नियमों की उड़ रही धज्जियां

रिपोर्ट: VBN News Desk1 घंटे पहलेझारखण्ड

टेलिफोनिक माध्यम से जिला परिषद अधिकारियों से यह पूछा गया कि टेंडर के लिए कितने लोगों ने फॉर्म भरे हैं, लेकिन विभाग की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई।

जिला परिषद लातेहार में खुलेआम टेंडर मैनेजिंग, नियमों की उड़ रही धज्जियां

लातेहार।लातेहार जिला परिषद कार्यालय लातेहार में 15वें वित्त आयोग मद से संचालित विकास योजनाओं की निविदा प्रक्रिया को लेकर अनियमितताओं की चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर संवेदकों द्वारा खुलेआम टेंडर मैनेजिंग किए जाने के आरोप लग रहे हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ संवेदक आपसी समझौते के तहत निविदा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। WhatsApp Video 2026-03-14 at 6.31.24 PM.mp4 जानकारी के अनुसार, लातेहार प्रखंड क्षेत्र में 16 योजनाओं के लिए कुल 184 बीक्यू (BOQ) की खरीदारी की गई है, जबकि बालूमाथ प्रखंड में 17 योजनाओं के लिए 102 बीक्यू खरीदे गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में बीक्यू खरीदी जाने के बाद संवेदकों के बीच टेंडर को मैनेज करने की चर्चाएँ जोरों पर हैं। आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोग पहले से ही योजनाओं को आपस में बांटकर प्रतिस्पर्धा की भावना को समाप्त कर रहे हैं।स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह पूरा खेल जिला परिषद अध्यक्ष पूनम देवी के कार्यालय के आसपास संचालित हो रहा है। संवेदक कार्यालय परिसर में बैठकर आपसी सहमति से टेंडर फाइलों को मैनेज करने की रणनीति बना रहे हैं। यह स्थिति प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

टेंडर में शामिल योजनाओं में अखरा एवं शेड निर्माण, तालाब निर्माण, छठ घाट के पास स्नानागार निर्माण, नाली निर्माण, पीसीसी सड़क निर्माण, गार्डवाल निर्माण तथा सामुदायिक भवन के जीर्णोद्धार जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएँ शामिल हैं। ये योजनाएँ ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से चलाई जाती हैं।टेलिफोनिक माध्यम से जिला परिषद अधिकारियों से यह पूछा गया कि टेंडर के लिए कितने लोगों ने फॉर्म भरे हैं, लेकिन विभाग की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई।

समाचार लिखे जाने तक यह प्रक्रिया जारी थी। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से निवेदन किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

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