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लोहरदगा की गोद में विराजे हैं ‘पहाड़ी बाबा’, प्राकृतिक 12 शिवलिंगों की अनूठी महिमा

रिपोर्ट: VBN News Desk8 घंटे पहलेझारखण्ड

आस्था के साथ प्रकृति का मनमोहक संगम, सावन और महाशिवरात्रि में उमड़ते हैं श्रद्धालु

लोहरदगा की गोद में विराजे हैं ‘पहाड़ी बाबा’, प्राकृतिक 12 शिवलिंगों की अनूठी महिमा

शंकर कुमार

लोहरदगा। झारखंड की बॉक्साइट नगरी के नाम से मशहूर लोहरदगा जिला केवल खनिज संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और धार्मिक आस्था के लिए भी जाना जाता है। लोहरदगा से करीब 26 किलोमीटर और कुडू प्रखंड मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर तान गांव की पहाड़ी पर स्थित ‘पहाड़ी बाबा’ का शिवधाम श्रद्धा और प्रकृति का अनूठा संगम है। सावन, हर सोमवार और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। 33.jpg प्राकृतिक रूप से विराजमान हैं 12 शिवलिंग मंदिर के पुजारी पंडित मधुदास गोस्वामी के अनुसार, पहाड़ी की चट्टानों के बीच बनी गुफा में भगवान भोलेनाथ का प्राकृतिक स्वरूप विराजमान है। यहां तीन प्रमुख शिलाओं को भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है। इसके अलावा पहाड़ी पर प्राकृतिक रूप से बने करीब 12 शिवलिंग भी मौजूद हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है।

यज्ञ के बाद हुई थी मूसलाधार बारिश स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 30-40 वर्ष पहले तान गांव और आसपास के इलाके में भीषण सूखा पड़ा था। बारिश के लिए ग्रामीणों ने पहाड़ी पर यज्ञ का आयोजन किया। मान्यता है कि यज्ञ संपन्न होते ही क्षेत्र में झमाझम बारिश हुई। इसके बाद से जिंगी, तान और राहे गांवों के लोगों की इस धाम के प्रति आस्था और मजबूत होती चली गई।

शिलाओं में राम-सीता और लक्ष्मण के दर्शन की मान्यता इस पहाड़ी से कई स्थानीय धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यहां भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण शिला के रूप में विराजमान हैं। महुआ के पेड़ों के समीप भगवान हनुमान और देवी मां का वास भी माना जाता है। पहाड़ी पर मौजूद एक पूर्ण चंद्राकार शिला भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है, जिसे देखने पर पूर्णिमा के चंद्रमा का आभास होता है।

रास्ता और सीढ़ियां बनीं, लेकिन पानी की समस्या बरकरार पहाड़ी तक श्रद्धालुओं की पहुंच आसान बनाने के लिए पूर्व विधायक स्व. कमल किशोर के प्रयास से सीढ़ियां, रास्ता और शेड का निर्माण कराया गया है। इससे पहाड़ी की चढ़ाई पहले की तुलना में सुगम हुई है। हालांकि, पहाड़ी पर जल स्रोत नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं को आज भी नीचे से पानी लेकर ऊपर जाना पड़ता है।

चोटी से दिखता है मनमोहक प्राकृतिक नजारा बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद पहाड़ी बाबा धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में उत्साह कम नहीं होता। पहाड़ी की चोटी से चारों ओर दिखाई देने वाला हराभरा प्राकृतिक दृश्य और शांत वातावरण लोगों को आकर्षित करता है। चढ़ाई की थकान यहां पहुंचकर मानो गायब हो जाती है और श्रद्धालु प्रकृति की सुंदरता के बीच बाबा भोलेनाथ की भक्ति में लीन हो जाते हैं। आस्था, प्रकृति और लोकविश्वास का यह संगम लोहरदगा के पहाड़ी बाबा धाम को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी खास बनाता है।

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