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सरायकेला में नई एसपी की कार्यशैली पर उठे सवाल, समय प्रबंधन और सरकारी संसाधनों के उपयोग पर बहस तेज

रिपोर्ट: MANISH 4 घंटे पहलेझारखण्ड

मुख्यालय से दूरी और बैठक रद्द होने से व्यवस्था पर उठे प्रश्न, सरकारी समय और धन की बर्बादी पर चर्चा, सवालों में नई एसपी की कार्यशैली

सरायकेला में नई एसपी की कार्यशैली पर उठे सवाल, समय प्रबंधन और सरकारी संसाधनों के उपयोग पर बहस तेज

सरायकेला-खरसावां : जिले की नई पुलिस अधीक्षक (एसपी) निधि द्विवेदी को पदभार ग्रहण किए लगभग 12 दिन हो चुके हैं लेकिन इतने कम समय में ही उनकी कार्यशैली को लेकर जिले में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर समय प्रबंधन, संवाद व्यवस्था, मुख्यालय में उपस्थिति और सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हाल के घटनाक्रमों ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है। हाल ही में एसपी द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को निर्धारित समय से अधिक इंतजार करना पड़ा जिसके बाद कई पत्रकार बिना प्रेस वार्ता में शामिल हुए लौट गए। इस घटना ने समय प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए। हालांकि पत्रकारों ने बाद में पुलिस द्वारा साझा प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर समाचार प्रकाशित कर अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभाई। इसके अगले दिन मंगलवार को जिले के सभी थाना प्रभारियों को एसपी कार्यालय में बैठक के लिए बुलाया गया। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से अधिकारी समय पर मुख्यालय पहुंचे। कई थाना क्षेत्र ऐसे हैं जहां से मुख्यालय तक पहुंचने में 40 से 70 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। सरकारी वाहन, चालक, डीजल, सुरक्षा व्यवस्था और समय - ऑल इन सबका उपयोग इस प्रकार की बैठकों में होता है। लेकिन इस बैठक में भी एक घंटे से अधिक इंतजार के बाद बैठक रद्द कर दी गई। बिना किसी ठोस चर्चा और स्पष्ट कारण के मीटिंग स्थगित होने से प्रशासनिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई। यह सवाल उठने लगा कि यदि बैठक के लिए तैयारी पूरी नहीं थी तो सभी अधिकारियों को मुख्यालय क्यों बुलाया गया। प्रशासनिक नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी बैठक के आयोजन में समय प्रबंधन, स्पष्ट सूचना और संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग अपेक्षित होता है। बिना तैयारी बैठक बुलाना और बाद में रद्द कर देना न केवल अधिकारियों के समय की बर्बादी है बल्कि सरकारी धन का भी अनावश्यक खर्च माना जाता है। सरकारी वाहन, ईंधन, चालक, सुरक्षा व्यवस्था और कार्यालयीय समन्वय - इन सब पर सार्वजनिक धन खर्च होता है। ऐसे में बिना परिणाम के बैठक रद्द होना सीधे तौर पर सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार एसपी निधि द्विवेदी सरायकेला स्थित अधिकृत एसपी आवास में नियमित रूप से नहीं रह रही हैं। बताया जाता है कि वे प्रतिदिन लगभग 50 किलोमीटर दूर जमशेदपुर में अपने पति एवं जमशेदपुर के एसएसपी पीयूष पांडे के साथ रहती हैं और वहीं से आवागमन करती हैं। इसे लेकर भी प्रशासनिक हलकों में चर्चा है। पुलिस प्रशासन की परंपरा और सेवा नियमों के अनुसार जिला पुलिस प्रमुख का मुख्यालय में उपलब्ध रहना आवश्यक माना जाता है ताकि किसी भी आपात स्थिति, कानून-व्यवस्था, रात्रिकालीन निरीक्षण, अपराध नियंत्रण या आकस्मिक प्रशासनिक निर्णय में त्वरित कार्रवाई हो सके। मुख्यालय से दूरी प्रशासनिक दक्षता को प्रभावित कर सकती है। हालांकि अब तक पूरे मामले पर एसपी कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन लगातार दो दिनों में हुई इन घटनाओं ने नई एसपी की कार्यशैली, प्रशासनिक प्राथमिकताओं और सरकारी संसाधनों के उपयोग पर गंभीर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एसपी का मुख्यालय में रहना केवल पद की गरिमा नहीं बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी भी है। यदि जिला प्रमुख ही नियमित रूप से मुख्यालय से दूर रहेंगे और बैठकों में समय प्रबंधन नहीं होगा तो प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब पूरे जिले में नई एसपी की कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है।

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