आदित्यपुर थाना की कार्यशैली पर उठे सवाल, फायरिंग कांड के आरोपी अब तक फरार
समन्वय की कमी या संरक्षण का साया? पखवाड़े बाद भी नहीं सुलझा सनसनीखेज मामला

आदित्यपुर : सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना की कार्यशैली इन दिनों सवालों के घेरे में है। थाना में कई अनुभवी पदाधिकारियों की तैनाती के बावजूद लंबित मामलों के निष्पादन में सुस्ती और समन्वय की कमी की चर्चा जोरों पर है। सूत्रों के अनुसार थाना प्रभारी और अन्य पदाधिकारियों के बीच तालमेल पूरी तरह संतोषजनक नहीं है जिसका असर जांच और कार्रवाई पर पड़ रहा है। इसका ताजा उदाहरण 14 मार्च को हुए संजय इलेक्ट्रॉनिक्स फायरिंग कांड में देखने को मिल रहा है जहां घटना के पखवाड़े भर बाद भी पुलिस को कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। इस मामले में अमन सिंह, अमित रंजन उर्फ शानू सिंह, ऋषि तिवारी और साहिल सोनकर के नाम सामने आए हैं लेकिन सभी आरोपी अब तक फरार हैं। जांच की जिम्मेदारी सतीश बर्नवाल को सौंपी गई है जो पहले भी थाना प्रभारी रह चुके हैं। इसके बावजूद आरोपियों तक पुलिस का नहीं पहुंच पाना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि आरोपियों को कहीं न कहीं संरक्षण मिल रहा है या वे पेशेवर अपराधी हैं जो आसानी से पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। यह भी बताया जा रहा है कि अमन सिंह और शानू सिंह आपस में सगे भाई हैं तथा उनके राजनीतिक संबंध भी हैं, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि थाना स्तर पर बेहतर टीमवर्क और समन्वय हो तो इस तरह के मामलों का शीघ्र खुलासा संभव है। फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती न केवल इस फायरिंग कांड का खुलासा करना है बल्कि आम जनता के बीच अपने प्रति भरोसा कायम रखना भी है। स्थानीय लोग अब जल्द कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।