विवादों में घिरे आरक्षी नीतीश कुमार की आदित्यपुर थाना में लगभग एक महीने के अंदर वापसी पर उठे सवाल, बॉडीगार्ड बनाए जाने से मचा बवाल
शिकायतों के बाद हटे, फिर मिली अहम जिम्मेदारी! आरक्षी नीतीश कुमार की तैनाती पर सामाजिक संगठनों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

आदित्यपुर : पूर्व में शिकायतों के बाद आदित्यपुर थाना से हटाए गए टाइगर मोबाइल के आरक्षी नीतीश कुमार (प्रेस विज्ञप्ति में पूर्व में नीतीश पांडेय का उल्लेख) की दोबारा आदित्यपुर थाना में तैनाती और वर्तमान थाना प्रभारी के बॉडीगार्ड के रूप में जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर क्षेत्र में सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और नागरिकों का कहना है कि जिस पुलिसकर्मी पर पूर्व में गंभीर आरोप लग चुके हों उसे पुनः संवेदनशील थाने में महत्वपूर्ण दायित्व देना पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जानकारी के अनुसार पूर्व पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी के कार्यकाल में तत्कालीन थाना प्रभारी विनोद तिर्की, टाइगर मोबाइल के आरक्षी राघविंदर सिंह और आरक्षी नीतीश कुमार के विरुद्ध एक महिला द्वारा गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रात के समय पुलिसकर्मी उसके घर में घुसे, तोड़फोड़ की, मारपीट की, महिला के साथ अभद्र व्यवहार किया तथा उसके बेटे को उठाकर थाने ले जाकर प्रताड़ित किया। साथ ही उसे कथित रूप से झूठे ड्रग्स मामले में फंसाने की धमकी भी दी गई थी। बताया जाता है कि शिकायत की जांच के बाद पूर्व एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की थी। इसी क्रम में आरक्षी नीतीश कुमार को आदित्यपुर थाना से हटाकर अन्यत्र भेज दिया गया था। हालांकि विभागीय जांच के अंतिम निष्कर्ष अथवा दंडात्मक कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि आरक्षी नीतीश कुमार करीब पांच से छह वर्षों तक आदित्यपुर थाना में तैनात रहे। इस दौरान उन पर कई प्रकार की शिकायतें सामने आईं। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उनका कथित रूप से नशा कारोबार से जुड़े लोगों के साथ संपर्क था तथा निर्दोष लोगों को फंसाने जैसी शिकायतें भी समय-समय पर उठती रहीं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही पुलिस विभाग ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। इधर आदित्यपुर क्षेत्र में हाल के दिनों में ड्रग्स से जुड़े मामलों के सामने आने के बीच आरक्षी की पुनः तैनाती को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हाल ही में रामबड़िया बस्ती से एक महिला को ड्रग्स मामले में हिरासत में लेने और बाद में छोड़ने को लेकर भी विभिन्न तरह की चर्चाएं सामने आईं। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि वायरल वीडियो और पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि पुलिस आम जनता के विश्वास की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है। उनका आरोप है कि यदि गंभीर आरोपों का सामना कर चुके कर्मियों को दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती हैं तो इससे पुलिस की साख प्रभावित हो सकती है। उन्होंने जिला पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि कोई विभागीय जांच लंबित है तो उसकी स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। उधर इस पूरे मामले में न तो आदित्यपुर थाना प्रभारी और न ही जिला पुलिस के किसी वरिष्ठ अधिकारी की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि जिला पुलिस प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और उठ रहे सवालों का क्या जवाब देता है।