बारिश ने बदली गांवों की तस्वीर, खेतों में लौटी रौनक, नई उम्मीद के साथ खेती में जुटे अन्नदाता
मानसून बना किसानों के सपनों का सहारा, अच्छी फसल की आस में धान की रोपाई ने पकड़ी रफ्तार

रिपोर्ट : सौरभ कुमार, जादूगोड़ा
मानसून की दस्तक के साथ जादूगोड़ा, घाटशिला, गालूडीह और आसपास के ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर खेतों में हरियाली लौटने लगी है। कुछ सप्ताह पहले तक बारिश नहीं होने से मायूस और चिंतित किसानों के चेहरे अब खिल उठे हैं। लगातार हो रही वर्षा ने न केवल सूखी धरती की प्यास बुझाई है बल्कि किसानों के मन में भी बेहतर फसल और खुशहाल भविष्य की नई उम्मीद जगा दी है। खेतों में हल-बैल, ट्रैक्टर, धान की नर्सरी और रोपाई में जुटे किसान इस बात का संकेत हैं कि अब कृषि कार्य पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। कुछ दिन पहले तक समय पर बारिश नहीं होने के कारण क्षेत्र के किसान भारी चिंता में थे। कई किसानों की धान की नर्सरी सूखने लगी थी जबकि कुछ किसानों को दोबारा नर्सरी तैयार करनी पड़ी। लगातार बढ़ती गर्मी और बारिश की कमी ने खेती पर संकट खड़ा कर दिया था। किसानों को डर सताने लगा था कि यदि समय पर वर्षा नहीं हुई तो इस वर्ष धान उत्पादन प्रभावित हो सकता है। लेकिन मानसून के सक्रिय होते ही परिस्थितियां बदल गईं और खेतों में फिर से जीवन लौट आया। इन दिनों गांवों में सुबह से लेकर शाम तक खेतों में किसानों की चहल-पहल देखने को मिल रही है। महिलाएं, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी खेती के कार्यों में जुटे हुए हैं। कहीं खेतों की जुताई हो रही है तो कहीं धान की रोपाई का कार्य चल रहा है। अधिकांश किसान अपने पूरे परिवार के साथ खेतों में मेहनत कर रहे हैं। उनके लिए खेती केवल रोजगार नहीं बल्कि जीवन का आधार है। सालभर के भोजन और परिवार की आर्थिक स्थिति काफी हद तक धान की अच्छी पैदावार पर निर्भर करती है। हालांकि खेती आज भी आसान नहीं है। किसानों को सिंचाई की सीमित व्यवस्था, समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज और खाद की उपलब्धता, बढ़ती लागत, कृषि मजदूरों की कमी तथा मौसम की अनिश्चितता जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद किसान हर वर्ष नए उत्साह और विश्वास के साथ खेतों में उतरते हैं। उनका मानना है कि मेहनत और प्रकृति का साथ मिला तो अच्छी फसल अवश्य होगी। बारिश शुरू होने के बाद क्षेत्र की खाद-बीज दुकानों पर भी किसानों की भीड़ बढ़ गई है। किसान धान के बीज, उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री की खरीदारी कर रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार इस क्षेत्र में किसान मुख्य रूप से सुपर सावली, बाली भजना, स्वर्णो और डाक स्वर्णो जैसी धान की किस्मों की खेती अधिक करते हैं। इन किस्मों की पैदावार अच्छी मानी जाती है और ये स्थानीय जलवायु एवं मिट्टी के अनुकूल भी हैं। किसानों का कहना है कि यदि पूरे सावन और भादो माह में समय-समय पर संतुलित वर्षा होती रही तो इस बार धान की फसल बेहतर होगी। इससे न केवल घर का अनाज सुरक्षित रहेगा बल्कि अतिरिक्त उपज बेचकर आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। किसानों को उम्मीद है कि इस वर्ष मौसम साथ देता है तो पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर उत्पादन प्राप्त होगा। वास्तव में किसान केवल अपने परिवार के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए अन्न उगाता है। जिस भोजन को हम प्रतिदिन सहजता से ग्रहण करते हैं उसके पीछे किसानों का अथक परिश्रम, पसीना और संघर्ष छिपा होता है। मौसम की मार, प्राकृतिक आपदाओं और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अन्नदाता हार नहीं मानता। यही जिजीविषा और समर्पण भारतीय कृषि संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत है। बारिश के साथ खेतों में लौटी यह हरियाली केवल फसलों की नहीं बल्कि किसानों के सपनों, उम्मीदों और आत्मविश्वास की भी हरियाली है। जादूगोड़ा, घाटशिला और गालूडीह क्षेत्र के खेतों में इन दिनों दिखाई दे रही रौनक इस बात का संकेत है कि यदि प्रकृति का साथ मिला और आवश्यक सरकारी सहयोग समय पर उपलब्ध हुआ तो इस वर्ष अन्नदाता की मेहनत अवश्य रंग लाएगी। किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान ही इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि अच्छी बारिश उनके लिए केवल मौसम का बदलाव नहीं बल्कि खुशहाली की नई शुरुआत है।