फूलों की दुनिया में संजय राय का जुनून, छत बनी खूबसूरत टेरेस गार्डन
पौधों के प्रति प्रेम ने घर की छत को बना दिया फूलों की अनोखी दुनिया

सौरभ कुमार, जादूगोड़ा
जादूगोड़ा के नवरंग मार्केट में अगर पौधों और फूलों के शौकीनों के बीच किसी ऐसे व्यक्ति का नाम लिया जाए जिसने अपने शौक को एक अलग पहचान दी है.. तो संजय कुमार राय का नाम सहज ही सामने आता है। यूसीआईएल में कार्यरत संजय राय नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ बागवानी के प्रति अपने जुनून को भी पूरी शिद्दत से निभा रहे हैं। उन्होंने अपने घर की छत को ही ऐसी खूबसूरत दुनिया में तब्दील कर दिया है जहां चारों ओर हरियाली, रंग-बिरंगे फूल और आकर्षक पौधे नजर आते हैं। उनका यह टेरेस गार्डन अब केवल उनके परिवार की खुशी का माध्यम नहीं बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है। संजय राय की छत पर तैयार यह गार्डन किसी सामान्य छत पर रखे गमलों का संग्रह नहीं है। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, धैर्य, नियमित देखभाल और प्रकृति के प्रति गहरा लगाव छिपा है। छत पर कदम रखते ही अलग-अलग रंगों और आकारों के फूलों से सजे पौधे लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। पौधों को जिस तरीके से व्यवस्थित किया गया है उससे पूरी छत एक छोटे से उद्यान का रूप ले चुकी है।
अडेनियम की अनगिनत किस्में बनीं खास पहचान
संजय राय के टेरेस गार्डन की सबसे बड़ी खासियत अडेनियम यानी डेजर्ट रोज के पौधों का संग्रह है। अलग-अलग रंग, आकार, बनावट और फूलों वाली अडेनियम की कई किस्में यहां देखने को मिलती हैं। जब इन पौधों पर एक साथ फूल खिलते हैं तो पूरी छत किसी फूलों की प्रदर्शनी जैसी दिखाई देने लगती है। अडेनियम के प्रति संजय राय का लगाव केवल फूलों की खूबसूरती तक सीमित नहीं है। वे पौधे की बनावट, तने के आकार और उसकी शाखाओं को भी विशेष महत्व देते हैं। समय-समय पर कटिंग और आकार देने की प्रक्रिया के माध्यम से वे पौधों को आकर्षक रूप प्रदान करते हैं। यही वजह है कि उनके संग्रह में कई ऐसे पौधे भी हैं जिनकी बनावट सामान्य पौधों से काफी अलग और आकर्षक दिखाई देती है। गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क मौसम में अच्छी तरह विकसित होने वाला अडेनियम अपनी मोटी तनेनुमा संरचना और खूबसूरत फूलों के लिए बागवानी प्रेमियों के बीच लोकप्रिय है। संजय राय ने इसकी विभिन्न वैरायटी को वर्षों से सहेजकर अपने टेरेस गार्डन में एक ऐसा संग्रह तैयार किया है जो पौधों के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।
पांच से दस वर्ष पुराने पौधे भी संग्रह का हिस्सा
संजय राय के गार्डन की खासियत सिर्फ फूलों की संख्या या रंगों की विविधता नहीं है। उनके संग्रह में कई पुराने और विशेष रूप से तैयार किए गए पौधे भी शामिल हैं। करीब पांच से दस वर्ष पुराने बोनसाई और अन्य आकर्षक पौधे उनके धैर्य और लगातार मेहनत की मिसाल हैं। बागवानी में किसी पौधे को मनचाहा आकार देने में लंबा समय लगता है। इसके लिए नियमित कटिंग, सही मिट्टी, उचित खाद, पानी की मात्रा और मौसम के अनुसार देखभाल जरूरी होती है। संजय राय के लिए यह सब किसी अतिरिक्त काम की तरह नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। पौधों की स्थिति देखना, नई कोंपल निकलने पर उसका निरीक्षण करना, सूखी शाखाओं की कटिंग करना और पौधे की जरूरत के अनुसार खाद-पानी उपलब्ध कराना उनके नियमित कार्यों में शामिल है। उनका मानना है कि पौधों की देखभाल में जल्दबाजी नहीं की जा सकती। पौधे को समय देना पड़ता है और उसकी जरूरत को समझना पड़ता है। यही धैर्य उनके वर्षों पुराने पौधों में साफ दिखाई देता है।
पौधे सजावट नहीं, परिवार के सदस्य जैसे
संजय राय के लिए पौधे महज घर की सजावट का माध्यम नहीं हैं। वह इन्हें परिवार के सदस्यों की तरह सहेजते हैं। सुबह का कुछ समय पौधों के बीच बिताना उनके दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पौधों को देखना, नई कली और फूलों को निहारना तथा जरूरत के अनुसार उनकी देखभाल करना उन्हें मानसिक संतुष्टि देता है। किसी पुराने पौधे में नई कोंपल निकलना या लंबे इंतजार के बाद पसंदीदा फूल खिलना उनके लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं। यही भाव उनके टेरेस गार्डन को महज एक बागवानी स्थल से आगे ले जाता है। यहां हर पौधे के साथ उनकी मेहनत और उससे जुड़ी एक कहानी नजर आती है।
आसपास के लोग भी लेते हैं बागवानी की जानकारी
संजय राय के टेरेस गार्डन की चर्चा अब नवरंग मार्केट और आसपास के इलाके में भी होने लगी है। फूल-पौधों में रुचि रखने वाले लोग उनके गार्डन को देखने पहुंचते हैं और पौधों की खूबसूरती की तारीफ करते हैं। कई लोग उनसे पौधों की देखभाल, मिट्टी की तैयारी, खाद के इस्तेमाल, पानी देने की सही मात्रा, कटिंग और फूलों को बेहतर तरीके से तैयार करने के संबंध में जानकारी भी लेते हैं। इस तरह संजय राय का शौक अब दूसरे लोगों के लिए प्रेरणा का माध्यम भी बन रहा है। विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए जिनके पास जमीन की कमी है लेकिन वे घर में हरियाली और फूलों की दुनिया बसाना चाहते हैं, उनका टेरेस गार्डन एक उदाहरण है।
छोटी जगह में भी उग सकती है बड़ी उम्मीद
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के पास बड़े बगीचे के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती। ऐसे में छत पर बागवानी का चलन तेजी से आकर्षित कर रहा है। संजय राय ने अपने शौक के माध्यम से यह साबित किया है कि बागवानी के लिए बड़े भूखंड की नहीं बल्कि इच्छाशक्ति, नियमित मेहनत और पौधों के प्रति लगाव की जरूरत होती है। उनकी छत इस बात की जीवंत मिसाल है कि सीमित स्थान को भी रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल कर प्रकृति के करीब पहुंचा जा सकता है। गमलों में लगे पौधे, बोनसाई की कलात्मक संरचनाएं और अडेनियम के रंग-बिरंगे फूल मिलकर इस टेरेस को एक अलग पहचान देते हैं।
प्रकृति से जुड़ने का संदेश देता है टेरेस गार्डन
संजय राय की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के शौक की कहानी नहीं है बल्कि प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा भी देती है। आधुनिक जीवनशैली में जब लोग धीरे-धीरे हरियाली और प्राकृतिक वातावरण से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे समय में घर की छत को पौधों और फूलों से सजाना पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का भी परिचय देता है। उनका टेरेस गार्डन यह संदेश देता है कि प्रकृति को अपने करीब लाने के लिए किसी बड़े संसाधन की आवश्यकता नहीं। एक छोटा गमला, उसमें लगाया गया पौधा और उसकी नियमित देखभाल से भी हरियाली की शुरुआत की जा सकती है। यदि शौक के साथ जुनून और धैर्य जुड़ जाए तो वही छोटा प्रयास वर्षों बाद एक खूबसूरत बगीचे का रूप ले सकता है। संजय कुमार राय की छत पर खिला हर फूल उनकी मेहनत की कहानी कहता है। पुराने बोनसाई उनके धैर्य की गवाही देते हैं जबकि अडेनियम की रंग-बिरंगी किस्में प्रकृति के प्रति उनके प्रेम को दर्शाती हैं। यूसीआईएल की नौकरी के साथ बागवानी के इस जुनून को बनाए रखना निश्चित रूप से उनके समर्पण को दर्शाता है। नवरंग मार्केट में उनका नाम अब केवल एक कर्मचारी के तौर पर नहीं बल्कि एक ऐसे जुनूनी बागवानी प्रेमी के रूप में भी पहचाना जाता है जिसने अपनी छत को फूलों की खूबसूरत दुनिया में बदल दिया है। उनका यह प्रयास आसपास के लोगों को भी प्रेरित करता है कि यदि घर में थोड़ी सी जगह है तो उसे खाली छोड़ने के बजाय पौधों और फूलों से सजाया जा सकता है। आखिरकार संजय राय का टेरेस गार्डन यही संदेश देता है कि हरियाली के लिए जगह से ज्यादा जरूरी है प्रकृति के प्रति प्रेम.. और जब प्रेम में जुनून जुड़ जाए तो घर की छत भी एक खूबसूरत बगीचे में बदल सकती है।