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सावन विशेष : खदानों की धरती पर आस्था का अद्भुत केंद्र : जादूगोड़ा का खदान बाबा शिव मंदिर

रिपोर्ट: VBN News Desk3 घंटे पहलेआर्टिकल

करीब 50 वर्ष पूर्व यूसील के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट क्षेत्र में खुदाई के दौरान एक शिवलिंग मिला था

सावन विशेष : खदानों की धरती पर आस्था का अद्भुत केंद्र : जादूगोड़ा का खदान बाबा शिव मंदिर

सौरभ कुमार, जादूगोड़ा

पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा की पहचान यूरेनियम की खदानों से है लेकिन इसी औद्योगिक नगरी की एक और पहचान है - खदान बाबा शिव मंदिर। जादूगोड़ा मोड़ चौक स्थित यह मंदिर आज हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बन चुका है। सावन का महीना आते ही यहां हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो उठता है। करीब 50 वर्ष पूर्व यूसील के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट क्षेत्र में खुदाई के दौरान एक शिवलिंग मिला। कर्मचारियों ने इसे भगवान शिव का दिव्य संकेत मानते हुए पूरे सम्मान के साथ जादूगोड़ा मोड़ स्थित पीपल के पेड़ के नीचे स्थापित किया। धीरे-धीरे यहां नियमित पूजा-अर्चना शुरू हुई और यह स्थान खदान बाबा शिव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि बाबा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। यही कारण है कि नौकरी, परीक्षा, व्यापार या किसी भी शुभ कार्य से पहले लोग बाबा का आशीर्वाद लेने अवश्य पहुंचते हैं। सावन में जादूगोड़ा, पोटका, मुसाबनी, राखा, घाटशिला और आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए यहां आते हैं। प्रत्येक सोमवार को विशेष रुद्राभिषेक, भजन, आरती और पूजा का आयोजन होता है। श्री श्री सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के संरक्षण में मंदिर का जीर्णोद्धार कर इसे भव्य स्वरूप दिया गया है। यहां भगवान शिव के साथ हनुमानजी, शनिदेव, मां तारा, मां दुर्गा, राधा-कृष्ण तथा तारकेश्वर धाम शिव की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। नियमित पूजा-अर्चना प्रसिद्ध पुजारी शक्ति पोदो मजूमदार द्वारा संपन्न कराई जाती है। सावन के अंतिम सोमवार को महाआरती, कीर्तन और महाप्रसाद का आयोजन हजारों श्रद्धालुओं को एक सूत्र में बांध देता है। खदान बाबा शिव मंदिर आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि जादूगोड़ा की आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक बन चुका है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु नई ऊर्जा, विश्वास और महादेव की कृपा का अनुभव लेकर लौटता है।

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