गमछा बिछाकर चंदा मांगने से लेकर मंत्री बनने तक: साइमन मरांडी की कहानी
साधारण जीवन से उठकर विधायक और मंत्री तक का सफर तय करने वाले साइमन मरांडी की संघर्षमय और प्रेरक जीवन यात्रा

अजय कुमार हिरणपुर (पाकुड) । झारखंड के निर्माण को ले हुई आंदोलन की बात लोगो के जुबा पे आती है तो साइमन मरांडी का नाम शीबू सोरेन के बाद आज भी आती है । झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की नींव मजबूत करने में उनका योगदान खासकर संताल परगना क्षेत्र में बेहद अहम माना जाता है। संघर्ष से शुरू हुआ सफर साइमन मरांडी का जीवन संघर्षों से भरा रहा। छात्र जीवन में राजनीति में आने की इच्छा तो थी, लेकिन आर्थिक तंगी सबसे बड़ी बाधा थी। ऐसे में उन्होंने हिरणपुर चौक के पास गमछा बिछाकर लोगों से चुनाव लड़ने के लिए चंदा मांगा। आम जनता ने भी उनका साथ दिया—यही संघर्ष उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया। *1977 में मछली छाप पर पहली बार विधायक बने थे साइमन साल 1977 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में “मछली छाप” चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। यह जीत उनकी राजनीतिक यात्रा का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। झामुमो गठन में अहम भूमिका शीबू सोरेन के साथ मिलकर उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के गठन में सक्रिय भूमिका निभाई। अलग झारखंड राज्य आंदोलन में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। विधायक और सांसद के रूप में लंबा सफर 1980 से उनके या उनके परिवार का लगातार राजनीतिक प्रभाव रहा 1985, 2009 और 2017 में विधायक बने 1989 और 1991 में राजमहल लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए परिवार की मजबूत राजनीतिक विरासत उनकी पत्नी सुशीला हांसदा 1990 से 2009 तक लिट्टीपाड़ा से चार बार विधायक रहीं। 2019 में खराब स्वास्थ्य के कारण उन्होंने अपने पुत्र दिनेश मरांडी को चुनाव मैदान में उतारा, जिसमें वे विजयी रहे। दोस्ती और आत्मविश्वास की मिसाल साइमन मरांडी अक्सर बताया करते थे कि सुखदेव भगत से उनकी गहरी दोस्ती थी। वे उनके होटल में खाना खाते थे और आत्मविश्वास से कहते थे— “मैं बहुत आगे जाऊंगा” — और उन्होंने यह सच कर दिखाया।
विधायक, सांसद से मंत्री बनने तक का सफर
अपने लंबे अनुभव और मजबूत जनाधार के दम पर साइमन मरांडी ने हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री पद तक का सफर तय किया। साइमन मरांडी की कहानी संघर्ष आत्मविश्वास और जनता के भरोसे की अनोखी मिसाल है। गमछा बिछाकर चंदा मांगने से लेकर मंत्री बनने तक का उनका सफर झारखंड की राजनीति का एक प्रेरणादायक अध्याय आज की राजनीतिक में स्थापित हो चुका है।