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पचुवाड़ा कोल माइंस विस्थापितों की प्रशासन से वार्ता अधूरी, जांच समिति के सदस्य नहीं पहुंचे

रिपोर्ट: कार्तिक कुमार4 घंटे पहलेझारखण्ड

अपर समाहर्ता को सौंपे साक्ष्य, 2013 भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा, नौकरी और ठेका कार्य की मांग दोहराई

पचुवाड़ा कोल माइंस विस्थापितों की प्रशासन से वार्ता अधूरी, जांच समिति के सदस्य नहीं पहुंचे

पाकुड़: आमड़ापाड़ा प्रखंड स्थित पचुवाड़ा कोल माइंस के विस्थापित बुधवार को अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन से वार्ता के लिए समाहरणालय पहुंचे। इस दौरान विस्थापितों ने अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन से मुलाकात कर अपने दावों के समर्थन में विभिन्न साक्ष्य प्रस्तुत किए।

गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से आंदोलनरत विस्थापितों के साथ जिला प्रशासन की बैठक के बाद एक जांच समिति का गठन किया गया था। समिति द्वारा बुधवार को वार्ता की तिथि निर्धारित की गई थी, लेकिन बैठक में अपर समाहर्ता के अलावा जांच समिति का कोई अन्य सदस्य उपस्थित नहीं हुआ।

पचुवाड़ा कोयला खदान विस्थापित मोर्चा के संयोजक मोहन मुर्मू ने बताया कि विस्थापितों की समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए गठित समिति में अनुमंडल पदाधिकारी, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी महेशपुर, जिला खनन पदाधिकारी, अंचल अधिकारी आमड़ापाड़ा तथा संबंधित खनन कंपनियों के महाप्रबंधकों को शामिल किया गया है।

विस्थापितों की मांग है कि प्रभावित आदिवासी रैयतों को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता अधिकार अधिनियम-2013 के तहत वर्तमान बाजार दर पर मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी तथा कोयला खनन एवं परिवहन कार्यों में सब-कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए।

विस्थापितों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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