चंदवा पहुँची 251 बर्खास्त अनुसेवकों की ‘न्याय पदयात्रा’, पुनर्बहाली की मांग तेज
उनकी एकमात्र मांग है—बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर उन्हें पुनः अपने पदों पर समायोजित किया जाए।

चंदवा : 251 बर्खास्त अनुसेवकों की न्याय पदयात्रा सोमवार की शाम चंदवा पहुँची। बर्खास्तगी के बाद लंबे समय तक शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर अनुसेवकों ने न्याय पदयात्रा का रास्ता चुना है। उनकी एकमात्र मांग है—बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर उन्हें पुनः अपने पदों पर समायोजित किया जाए।
अनुसेवकों ने बताया कि बर्खास्तगी से पूर्व न तो उन्हें कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही कारण बताओ नोटिस जारी हुआ। प्रशासन की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि जिन पदों पर उनकी नियुक्ति हुई थी, उनके लिए कोई विधिवत विज्ञापन नहीं था। इस पर अनुसेवकों का सवाल है कि विज्ञापन संबंधी त्रुटि किसी अनुसेवक द्वारा नहीं, बल्कि अधिकारियों के स्तर पर हुई होगी—तो उसकी सजा वे क्यों भुगतें?
अनुसेवकों का कहना है कि उन्होंने 7 से 8 वर्षों तक अपने-अपने विभागों में निरंतर सेवा दी है। इतने वर्षों की सेवा के बाद बिना सुनवाई के बर्खास्त किया जाना अमानवीय और अनुचित है। उन्होंने सरकार से न्याय की मांग करते हुए कहा कि या तो उन्हें पुनः बहाल किया जाए, अन्यथा उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए।
बर्खास्त अनुसेवक संघ के बैनर तले निकली इस न्याय पदयात्रा में शामिल यात्रियों ने बताया कि वे पूरी रात पैदल चलेंगे और मंगलवार सुबह रांची पहुँचकर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करेंगे।